बरेली में प्रशासनिक हलचल: सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपना पद छोड़ने का फैसला लिया और इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे का मुख्य कारण केंद्र सरकार के यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) बिल और हाल ही में शंकराचार्य के साथ हुई एक घटना को बताया है। इस्तीफे की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा पत्र दिखाते हुए भावुक अंदाज में बात की है। यह घटना यूपी प्रशासनिक सेवा में नई बहस छेड़ रही है।
इस्तीफे का कारण: यूजीसी बिल और शंकराचार्य घटना
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि यूजीसी के नए बिल से उच्च शिक्षा में केंद्रीकरण बढ़ेगा और राज्य सरकारों के अधिकारों पर अतिक्रमण होगा। उनका कहना है कि यह बिल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करेगा और शिक्षकों-छात्रों के हितों के खिलाफ जाएगा।
दूसरा बड़ा कारण हाल ही में शंकराचार्य के साथ हुई एक घटना है। अलंकार ने इसे “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया और कहा कि ऐसी घटनाओं पर प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने लिखा, “एक सिविल सर्वेंट के तौर पर मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता। इसलिए मैंने इस्तीफा देना उचित समझा।”
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर और प्रतिक्रियाएं
इस्तीफे की तस्वीर में अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा पत्र हाथ में लिए खड़े हैं। तस्वीर में उनकी आंखें नम दिख रही हैं और चेहरे पर दृढ़ संकल्प झलक रहा है। यह तस्वीर ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाखों बार शेयर हो चुकी है। लोग इसे “साहस की मिसाल” और “ईमानदारी का प्रतीक” बता रहे हैं।
- समर्थकों का कहना है कि अलंकार ने अपनी नौकरी से ज्यादा सिद्धांतों को चुना
- विपक्षी नेता इसे “सरकार विरोधी कदम” बता रहे हैं
- कई IAS-PCS अधिकारी चुपचाप समर्थन जता रहे हैं
यूजीसी बिल विवाद का संक्षिप्त पृष्ठभूमि
हाल ही में यूजीसी ने नया बिल प्रस्तावित किया है, जिसमें विश्वविद्यालयों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम और फंडिंग में केंद्र सरकार को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। कई राज्य सरकारें और शिक्षाविद इसे “संघीय ढांचे पर हमला” मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी इस बिल का विरोध हो रहा है। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा इस विवाद को नया आयाम देता है।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव
बरेली जिला प्रशासन में यह इस्तीफा बड़ा झटका माना जा रहा है। अलंकार अग्निहोत्री एक ईमानदार और
मेहनती अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। उनका
यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा या चुनौती दोनों बन सकता है।
राजनीतिक दलों ने भी बयान जारी किए हैं। सपा और कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश बताई,
जबकि भाजपा ने इसे “व्यक्तिगत फैसला” करार दिया।
आगे क्या होगा?
अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उनकी सेवा से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं।
क्या यह इस्तीफा मंजूर होगा या वापस लिया जाएगा? क्या अन्य अधिकारी भी ऐसा कदम उठाएंगे? आने वाले दिनों में यह मामला और गरमाने की संभावना है।
अलंकार अग्निहोत्री का यह फैसला सिद्धांतों और नौकरी के बीच चयन का प्रतीक बन गया है।
उनकी तस्वीर अब सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि एक संदेश बन चुकी है।