बखिरा झील: उत्तर प्रदेश का अनमोल पक्षी अभयारण्य।
संतकबीरनगर जिले में स्थित बखिरा झील उत्तर प्रदेश के प्रमुख वेटलैंड्स में से एक है। यह प्राकृतिक जलाशय करीब 28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का घर बन जाता है। साइबेरिया, मंगोलिया और यूरोप से उड़कर आने वाले ये पक्षी झील के शांत जल और समृद्ध पारिस्थितिकी के कारण यहां ठहरते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में अवैध शिकार के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है। 2025 की वन्यजीव सर्वे के अनुसार, पहले जहां 50 से अधिक प्रजातियां दिखती थीं, अब वह संख्या 30 तक सिमट गई है। स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि बिना तत्काल कार्रवाई के यह झील अपना जैव-विविधता खो सकती है।
प्रवासी पक्षियों की विविधता: कौन-कौन आते हैं बखिरा झील?
बखिरा झील प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग है। यहां सरस क्रेन (सारस), मालार्ड, पिनटेल, ग्रील, पेलिकन और कोटेरा जैसी दुर्लभ प्रजातियां नजर आती हैं।
बखिरा झील प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग है। यहां सरस क्रेन (सारस), मालार्ड, पिनटेल, ग्रील, पेलिकन और कोटेरा जैसी दुर्लभ प्रजातियां नजर आती हैं।
सरस क्रेन: भारत का राज्य पक्षी, जो झील के किनारों पर घोंसले बनाता है।मालार्ड और पिनटेल: पानीी पक्षी, जो झील के गहरे जल में भोजन खोजते हैं।
बगुलों की प्रजातियां: ग्रे हेरॉन और पर्पल हेरॉन, जो मछलियों पर निर्भर।
ये पक्षी अक्टूबर से मार्च तक रहते हैं, जो झील को पर्यटन का केंद्र बनाते हैं। लेकिन शिकारियों द्वारा जाल और बंदूकों का इस्तेमाल इनकी जान ले रहा है।
पक्षी शिकार का खतरा: कारण और प्रभाव
अवैध पक्षी शिकार बखिरा झील के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। स्थानीय मछुआरे और बाहरी शिकारी रातोंरात जाल बिछा देते हैं, जिससे सैकड़ों पक्षी मारे जाते हैं। मुख्य कारण:
आर्थिक लालच: पक्षियों का मांस और अंडे बाजार में ऊंचे दाम पर बिकते हैं।
जागरूकता की कमी: ग्रामीणों को पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व का पता नहीं।
प्रशासनिक लापरवाही: वन विभाग की पेट्रोलिंग अपर्याप्त।
परिणामस्वरूप, 2024-25 में पक्षी संख्या 20% घटी। इससे झील की खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो रही है—मछलियां बढ़ रही हैं, जो जल गुणवत्ता बिगाड़ रही हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चेतावनी है
संरक्षण प्रयास: क्या हो रहा है बखिरा झील के लिए?
उत्तर प्रदेश सरकार ने बखिरा झील को रैमसर साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में कदम उठाए हैं। WWF और स्थानीय NGO पक्षी गणना अभियान चला रहे हैं।
यदि ये कदम उठाए गए, तो बखिरा झील फिर से हजारों पक्षियों का घर बनेगी। पर्यटक भी बढ़ेंगे, जो संतकबीरनगर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। आइए, हम सब मिलकर इस प्राकृतिक धरोहर को बचाएं!