सपा विधायक रमाकांत यादव को एक साल की सजा और जुर्माना
आजमगढ़। समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता, फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक और पूर्व सांसद रमाकांत यादव को 19 साल पुराने एक मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा और जुर्माना सुनाया है।
विशेष मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) अनुपम कुमार त्रिपाठी की अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने रमाकांत यादव पर 3800 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मामला क्या था?
यह मामला करीब 19 साल पुराना, यानी वर्ष 2006 का है। बताया जाता है कि रमाकांत यादव ने अपने समर्थकों के साथ दीदारगंज-खेतासराय मार्ग पर जाम लगा दिया था। इस दौरान सरकारी कार्यों में बाधा पहुँची थी और प्रशासनिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई थी।
इसी दौरान रमाकांत यादव और उनके समर्थकों पर आरोप था कि वे दीदारगंज थाने से अपने एक समर्थक को छुड़ाने के लिए दबाव बना रहे थे।
घटना का विवरण
छह अप्रैल 2006 की सुबह लगभग 7 बजे, रमाकांत यादव अपने 250 समर्थकों के साथ दीदारगंज थाने पहुँच गए।
वहाँ उन्होंने थाना प्रभारी मधुप कुमार सिंह पर एक समर्थक को छोड़ने का दबाव बनाया।
इससे पहले उन्होंने रास्ते में जाम लगाकर सरकारी कार्यों में बाधा भी डाली थी।
आरोप पत्र और सुनवाई
इस मामले में रमाकांत यादव के अलावा उनके दो समर्थक फूलचंद और वीरेंद्र के खिलाफ भी अदालत में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। हालांकि, सुनवाई के दौरान ही दोनों की मृत्यु हो गई, जिससे उन पर चल रहा मुकदमा समाप्त कर दिया गया।
अंततः, अदालत ने रमाकांत यादव को इस मामले में दोषी पाया और एक साल की सजा व जुर्माना सुनाया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
रमाकांत यादव आजमगढ़ की राजनीति के बेहद चर्चित और विवादित नेताओं में गिने जाते हैं। वे कई बार सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में सपा विधायक हैं। उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी समय-समय पर दर्ज होते रहे हैं।
निष्कर्ष
19 साल पुराने इस मामले में अदालत का यह फैसला न केवल रमाकांत यादव के राजनीतिक करियर पर असर डालेगा, बल्कि सपा की साख पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। यह घटना बताती है कि कानून का शिकंजा देर-सबेर जरूर कसता है, चाहे आरोपी कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।