गोरखपुर के चौरीचौरा में
गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र में गेहूं की कटाई के दौरान आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है। खेतों में पक चुकी गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई का काम जोरों पर है, लेकिन इसी बीच आग लगने की घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कटाई के साथ बढ़ा खतरा
इस समय क्षेत्र में अधिकतर गेहूं की कटाई कंबाइन मशीनों से की जा रही है। कटाई के बाद खेतों में भूसा बनाने वाली मशीनें भी सक्रिय हो गई हैं। किसानों का कहना है कि इन्हीं मशीनों के कारण चिंगारी निकलने की आशंका रहती है, जो सूखी फसल में आग लगने का कारण बन रही है।
पिछले कुछ दिनों में कई खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें खड़ी फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बिजली कटौती से बचाव की कोशिश
तेज हवाओं और आग की घटनाओं को देखते हुए बिजली विभाग ने एहतियात के तौर पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली कटौती शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह है कि बिजली लाइनों से निकलने वाली चिंगारी या तकनीकी खराबी से आग लगने की संभावना कम हो सके।
हालांकि, किसानों का कहना है कि केवल बिजली कटौती से समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सकता, इसके लिए अन्य जरूरी कदम भी उठाने होंगे।
किसानों की प्रमुख मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक गेहूं की पूरी कटाई और मड़ाई नहीं हो जाती, तब तक भूसा बनाने वाली मशीनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
किसान अनुज दुबे ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना
प्रशासन को सख्त निर्णय लेना चाहिए, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रह सके।
अनुज दुबे के साथ-साथ विकास, राजू, तेज प्रताप, सतेंद्र, रमेश और विजय सहित
कई अन्य किसानों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
फायर ब्रिगेड की तैनाती की मांग
किसानों ने यह भी मांग की है कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को तैनात किया जाए।
उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की स्थिति में
फायर ब्रिगेड के पहुंचने में काफी समय लग जाता है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
यदि पहले से ही फायर ब्रिगेड की व्यवस्था रहेगी तो आग पर
जल्दी काबू पाया जा सकेगा और फसलों को बचाया जा सकेगा।
प्रशासन के लिए चुनौती
लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। एक तरफ किसानों की सुरक्षा और
फसल बचाने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर मशीनों पर प्रतिबंध लगाने
जैसे फैसलों का असर कृषि कार्यों पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में प्रशासन को संतुलित निर्णय लेते हुए किसानों की समस्याओं का समाधान निकालना होगा।
किसानों की बढ़ती चिंता
गेहूं किसानों के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है,
क्योंकि पूरे साल की मेहनत इसी फसल पर निर्भर करती है।
ऐसे में आगजनी की घटनाएं उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो
बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता है।
चौरीचौरा क्षेत्र में बढ़ती आगजनी की घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। किसानों की मांग है कि
प्रशासन तुरंत ठोस कदम उठाए और उनकी फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
