गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण निजीकरण को लेकर गोरखपुर के बिजली कर्मचारियों में गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। 11 दिसंबर 2025 को कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर चेतावनी दी कि अगर निजीकरण और नौकरी कटौती का फैसला नहीं रोका गया तो आंदोलन और तेज होगा। अमर उजाला और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट्स के अनुसार, गोरखपुर में पिछले कुछ महीनों से कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि निजीकरण से हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है और बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। यह ब्लॉग गोरखपुर बिजली कर्मचारियों के आंदोलन की पूरी डिटेल्स, उनकी मांगें, निजीकरण का प्रस्ताव, सरकार का पक्ष और प्रभाव बताता है। यदि आप गोरखपुर या यूपी में रहते हैं या बिजली कर्मचारियों के मुद्दे से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।
बिजली कर्मचारियों का गुस्सा: निजीकरण और नौकरी कटौती के खिलाफ
गोरखपुर में बिजली कर्मचारी यूनियनों ने पिछले 2 महीनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मांगें:
- बिजली वितरण का निजीकरण रुके।
- किसी भी कर्मचारी की नौकरी न जाए।
- बिजली दरों में बढ़ोतरी न हो।
- पुरानी पेंशन योजना बहाल हो।
कर्मचारी नेता ने कहा, “निजीकरण से आम जनता पर बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।”
निजीकरण का प्रस्ताव: यूपी सरकार की योजना
योगी सरकार ने यूपी में बिजली वितरण को निजीकरण के लिए प्रस्ताव रखा है। योजना के तहत गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में निजी कंपनियां बिजली सप्लाई करेंगी। सरकार का दावा है कि इससे बिजली की गुणवत्ता बढ़ेगी और घाटा कम होगा।
कर्मचारियों की चेतावनी: आंदोलन और तेज होगा
11 दिसंबर को कर्मचारी संगठनों ने गोरखपुर में एक बड़ी रैली निकाली। उन्होंने कहा, “अगर सरकार नहीं मानी तो रेल रोको, हाईवे जाम और हड़ताल करेंगे।