
गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र अंतर्गत रकौली गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया। यहां पोखरे के किनारे स्थित चबूतरे पर वर्षों से पूजी जा रही मां काली और डीह बाबा की प्रतिमाओं को अज्ञात अराजक तत्वों ने बुरी तरह तोड़ दिया। सुबह ग्रामीणों को जब मां काली प्रतिमा तोड़ी हुई और डीह बाबा मूर्ति क्षतिग्रस्त हालत में मिली, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। तत्काल ग्रामवासियों ने गोला थाना पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।
घटना का पूरा विवरण
मां काली और डीह बाबा प्रतिमा तोड़ने की घटना रकौली गांव के पोखरे के पास एक पुराने चबूतरे पर हुई, जहां ये प्रतिमाएं दशकों से स्थापित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पास ही एक खंडहर सरकारी भवन है, जो शाम ढलते ही अराजक तत्वों का अड्डा बन जाता है। ये लोग वहां शराब पीते हैं और अन्य असामाजिक गतिविधियां करते हैं, जिससे गांववासी लंबे समय से परेशान थे। सुबह की सैर पर पोखरे के पास पहुंचे ग्रामीणों ने टूटी प्रतिमाओं को देखा तो हड़बड़ा गए। उन्होंने फौरन गोरखपुर पुलिस को कॉल किया। पहुंची पुलिस ने न केवल क्षतिग्रस्त मूर्तियों को हटाया, बल्कि तुरंत नई प्रतिमा स्थापित करवा दी, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
गोला पुलिस की फुर्ती भरी कार्रवाई ने सभी को प्रभावित किया। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने घटनास्थल को सील कर जांच शुरू की। स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। क्षेत्राधिकारी दरवेश कुमार ने बताया कि आरोपी उसी खंडहर भवन के आसपास मंडराने वाले शराबी तत्व थे। पुलिस ने मां काली प्रतिमा तोड़ने और डीह बाबा मूर्ति क्षतिग्रस्त करने के आरोप में दोनों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पूछताछ में और राजफसानें सामने आने की संभावना है। यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और भविष्य की मांगें
रकौली गांव के निवासियों ने गोरखपुर क्राइम न्यूज में इस घटना को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि अराजक तत्वों का जमावड़ा रोकने के लिए पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीण पुलिस प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि खंडहर भवन को तुरंत ध्वस्त किया जाए और क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए। मां काली और डीह बाबा की नई प्रतिमा स्थापित होने से गांव में शांति लौटी, लेकिन विश्वास बहाली के लिए सख्त कदम जरूरी हैं। यह घटना गोरखपुर पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है, जो धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती नजर आई।