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गोरखपुर के राजवंशी अस्पताल के संचालक डॉ. राजीव प्रताप राय से ज़मीन की फर्जी सौदेबाज़ी कर डेढ़ करोड़ रुपए ठगने वाले मुख्य आरोपी अखिलेश यादव को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में यह गिरफ्तारी होटल प्रबंधन के बैंकेट, ओडिसा के निवासी अखिलेश पर हुई है। पुलिस के अनुसार, अखिलेश ने अपना नेटवर्क बनाकर विस्तार से ठगी की योजना बनाई थी। उसने सीधे अस्पताल संचालक को झांसे में लिया, उनके भरोसे के साथ खेला और ज़मीन दिलाने का प्रलोभन देकर फर्जी सौदा किया।
ठगी की पूरी कहानी
राजवंशी अस्पताल के संचालक से ज़मीन के सौदे की बात अखिलेश ने की और उनकी मुलाकात में झांसा देकर एक फर्जी एग्रीमेंट तैयार कराया। इसके बाद अस्पताल संचालक डॉ. राजीव से 1 करोड़ 50 लाख रुपए की रकम कई चरणों में ले ली गई। शुरुआत में अस्पताल संचालक को यह विश्वास दिलाया गया कि सारे कागज़ात और लेन-देन पूरी तरह वास्तविक हैं और उसी भरोसे में संचालक ने राशि दे दी। जब अस्पताल संचालक ने ज़मीन की रजिस्ट्री कराने के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी बहानेबाज़ी करता रहा। कई बार लखनऊ और दिल्ली बुलाया गया, लेकिन हर बार कागज़ी कार्रवाई या ज़मीन की रजिस्ट्री को टालते रहा।
किराए के दस्तावेज़ और धोखाधड़ी
पुलिस के अनुसार, अखिलेश यादव ने फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए। जिस जमीन का सौदा हुआ, वह न तो उसकी थी और न ही ऐसी कोई वास्तविक जमीन थी। दस्तावेज़ दिखाकर अस्पताल संचालक से किस्तों में डेढ़ करोड़ रुपये ले लिए गए। जब ज़मीन की असलियत का पता चला और संचालक ने पुलिस से शिकायत की तो जांच शुरू हुई और जांच में पाया गया कि चार आरोपियों ने मिलकर योजना बनाई थी। इनमे मुख्य आरोपी अखिलेश यादव ही था, जिसने रियल एस्टेट कारोबार का मुखौटा पहनकर जालसाज़ी की।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
गोरखपुर पुलिस ने आरोपी अखिलेश यादव को धर दबोच लिया है। अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है। पुलिस ने बताया कि अखिलेश गंभीर ठग-भ्रमित कारगुज़ारियों में लिप्त रहा है। उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन इस केस में पुलिस को पुख्ता सबूत मिले तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी से पूछताछ में सामने आया है कि वह कई रिएल एस्टेट सौदों में अदालत या पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश करता रहता था।
अन्य आरोपी और ठगी का नेटवर्क
इस घटना के अन्य दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस जुटा हुई है। इन आरोपियों ने अपने नाम-आईडी का दुरुपयोग कर ओडिशा और अन्य राज्यों में भी ठगी के मामले किए हैं। ग्रुप का नेटवर्क काफी फैल है, और पुलिस इनकी संपत्तियों की छानबीन कर रही है। थाना कैंट के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अखिलेश को सोमवार को न्यायालय भेजा जाएगा।
पीड़ित का बयान और जनता को संदेश
पीड़ित डॉक्टर ने कहा कि जालसाजों का नेटवर्क अत्यंत शक्तिशाली और संगठित है। उन्होंने अपील की है कि संपत्ति या ज़मीन संबंधी बड़े सौदों में हमेशा सतर्कता बरतें, पूरी जांच-पड़ताल कर लें, बिना कानूनी सलाह के कोई दस्तावेज़ साइन न करें। पुलिस ने जागरूकता फैलाने का भी संदेश दिया है।
ठगी का तरीका और मामले की सच्चाई
आरोपी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए अविश्वसनीय लाभ, छूट और नकद रिटर्न का लालच देता था। संचालकों, उद्यमियों और बिजनेस मैनों को फौन कॉल्स, वेबसाइट और नकली ऑफिस सेटअप बनाकर आकर्षित करता था। दस्तावेज़ दिखाओं, नकली स्टैंप, नकली मुआवजा समझौता पत्र और फर्जी मालिकाना हक दिखाकर लोगों को विश्वास दिलाता था।
पुलिस की चुनौतियां
जांच एजेंसी के लिए ऐसे मामलों की पड़ताल करना मुश्किल होता है क्योंकि आरोपी कई बार नाम, पहचान, दस्तावेज़, लोकेशन बदलता रहता था। जालसाजों के नेटवर्क को पकड़ना कठिन चुनौती है। पुलिस अफसरों के अनुसार ऐसे मामले में पूरी सतर्कता, इंटरस्टेट सहयोग, साइबर टीम और कानूनी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है।
समाज और व्यवसाय जगत को चेतावनी
संपत्ति संबंधी लेन-देन में खास सतर्कता रखें, अजनबी प्रस्तावों से सावधान रहें। अस्पताल सहित सभी छोटे-बड़े संस्थान को अपने व्यापारिक सौदों की कड़ी निगरानी करनी चाहिए। फर्जी दस्तावेज़, नकली वकील या एजेंट, और अवास्तविक सौदों से दूर रहें। पुलिस और कानूनी सलाहकारों से प्रत्येक दस्तावेज़ की सत्यता जरूर जांचें।
निष्कर्ष
गोरखपुर के अस्पताल संचालक से जालसाज़ी करने वाला मुख्य आरोपी अखिलेश यादव पुलिस की गिरफ्त में है। यह मामला दर्शाता है कि बड़े भौतिक संपत्ति सौदों में सावधानी और कानूनी जांच बेहद जरूरी हैं। ऐसे ठगों से सतर्क रहना समूचे समाज और व्यवसायजगत के लिए जरूरी है। अन्य दो आरोपी अभी फरार हैं, पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।