बीजेपी उम्मीदवार श्रीचंद तेजवानी की अप्रत्याशित जीत ने सभी को हैरान कर दिया। अंतिम समय में AIMIM की पार्षद मीरा कांबले ने उनका समर्थन कर दिया, जिससे महायुति गठबंधन की सत्ता कायम रही। इस कदम के विरोध में AIMIM ने मीरा कांबले को पार्टी से निष्कासित कर दिया। वहीं, उपमहापौर पद युवा स्वाभिमान पार्टी के सचिन भेंडे को मिला। यह घटना स्थानीय राजनीति में गठबंधन और विश्वासघात की मिसाल बन गई है।
अमरावती मेयर चुनाव का बैकग्राउंड: तीखी टक्कर और अप्रत्याशित ट्विस्ट
अमरावती नगर निगम के मेयर चुनाव 2026 में बीजेपी, AIMIM, युवा स्वाभिमान पार्टी और अन्य दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। श्रीचंद तेजवानी, जो बीजेपी के मजबूत दावेदार थे, को शुरुआत में कड़ी चुनौती मिल रही थी। AIMIM की पार्षदों की संख्या निर्णायक थी, लेकिन अंतिम चरण में मीरा कांबले का फैसला सबको चौंका गया। उन्होंने खुलेआम बीजेपी के श्रीचंद तेजवानी का समर्थन घोषित कर दिया, जिससे वोटिंग में बीजेपी को बहुमत मिल गया। यह समर्थन बिना किसी पूर्व सूचना के आया, जिसने अमरावती मेयर चुनाव को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया।
मीरा कांबले का समर्थन: अंतिम समय का गेम-चेंजर फैसला
AIMIM पार्षद मीरा कांबले का श्रीचंद तेजवानी को समर्थन अमरावती मेयर चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वोटिंग से ठीक पहले मीरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि वे बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देंगी। इस फैसले से AIMIM के कई पार्षद हैरान रह गए। मीरा ने तर्क दिया कि अमरावती के बुनियादी ढांचे, सड़क, पानी और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर महायुति ज्यादा सक्रिय है। उनका यह स्टैंड स्थानीय मुस्लिम समुदाय में भी चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि AIMIM को अल्पसंख्यक हितों का चैंपियन माना जाता है।
इस समर्थन के बिना श्रीचंद तेजवानी की जीत मुश्किल थी। चुनाव परिणाम में बीजेपी को 1-2 वोटों की मामूली बढ़त मिली, जो मीरा के क्रॉस-वोटिंग का सीधा नतीजा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मेयर चुनाव अमरावती में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और स्थानीय मुद्दों का मिश्रण था। मीरा कांबले अब स्वतंत्र पार्षद के रूप में सक्रिय रहेंगी।
AIMIM का सख्त फैसला: मीरा कांबले को निष्कासन और राजनीतिक संदेश
AIMIM ने मीरा कांबले को पार्टी से निष्कासित करने का फैसला तुरंत लिया। पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसे ‘गद्दारी’ बताया और कहा कि पार्टी लाइन से इतर जाना बर्दाश्त नहीं। निष्कासन पत्र जारी होते ही अमरावती में AIMIM कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना AIMIM की महाराष्ट्र इकाई के लिए झटका है, जहां वे लोकल बॉडीज में मजबूत पकड़ बना रहे थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निष्कासन अमरावती मेयर चुनाव के बाद AIMIM की साख बचाने की कोशिश है।
पार्टी अब नए चेहरे लाने की तैयारी में है। मीरा कांबले ने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
वे जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं और राजनीतिक लेबल से ऊपर उठकर काम करेंगी।
उपमहापौर पद पर सचिन भेंडे की नियुक्ति: महायुति गठबंधन की जीत
मेयर चुनाव के साथ ही उपमहापौर पद पर युवा स्वाभिमान पार्टी के सचिन भेंडे को चुना गया।
यह महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना-अजित पवार एनसीपी) की रणनीति का हिस्सा था।
सचिन भेंडे, युवा नेता के रूप में लोकप्रिय,
अब अमरावती के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।
श्रीचंद तेजवानी मेयर और सचिन भेंडे डिप्टी मेयर के साथ महायुति की सत्ता कायम हो गई।
यह गठबंधन स्थानीय मुद्दों जैसे बाढ़ प्रबंधन, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और रोजगार पर फोकस करेगा। विपक्षी दलों ने
इसे ‘सौदा’ करार दिया, लेकिन महायुति समर्थक इसे स्थिरता का प्रतीक बता रहे हैं।
अमरावती मेयर चुनाव का भविष्य पर प्रभाव: राजनीतिक समीकरण में बदलाव
अमरावती मेयर चुनाव 2026 ने महाराष्ट्र की लोकल पॉलिटिक्स को नया मोड़ दिया।
श्रीचंद तेजवानी की जीत से बीजेपी का आत्मविश्वास बढ़ा है।
मीरा कांबले का AIMIM निष्कासन अल्पसंख्यक वोटबैंक पर सवाल उठाता है। सचिन भेंडे को उपमहापौर पद मिलने से
युवा स्वाभिमान पार्टी मजबूत हुई। कुल मिलाकर, महायुति गठबंधन की सत्ता बरकरार रही
