9 जनवरी 2026 को एक बड़ी खबर सामने आई कि अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) से औपचारिक रूप से बाहर होने का फैसला लिया है। यह कदम नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल की शुरुआत में ही उठाया गया, जो पहले भी जलवायु परिवर्तन समझौतों से अमेरिका को बाहर निकाल चुके हैं। लेकिन भारत सरकार के वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ISA पूरी तरह कायम रहेगा और इस फैसले से भारत के सोलर मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ISA क्या है और भारत की भूमिका
इंटरनेशनल सोलर अलायंस की स्थापना 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान भारत और फ्रांस ने मिलकर की थी। इसका मुख्यालय गुड़गांव (हरियाणा) में है। ISA का उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, विकासशील देशों में सोलर टेक्नोलॉजी सस्ती बनाना और 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश जुटाना है।
वर्तमान में ISA में 116 सदस्य देश हैं और यह संयुक्त राष्ट्र के तहत एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का दर्जा प्राप्त कर चुका है। भारत और फ्रांस इसके संयुक्त अध्यक्ष हैं। भारत ने ISA को अपनी ग्लोबल लीडरशिप और क्लीन एनर्जी डिप्लोमेसी का प्रमुख प्लेटफॉर्म बनाया है।
अमेरिका के बाहर होने का कारण
ट्रंप प्रशासन ने 2017 में ही पेरिस समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला था। अब ISA से भी बाहर होने का फैसला उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा कि “अमेरिका अपनी ऊर्जा नीतियों को स्वतंत्र रूप से तय करेगा और बहुपक्षीय संगठनों पर निर्भर नहीं रहेगा।”
हालांकि अमेरिका ISA का संस्थापक सदस्य नहीं था, लेकिन 2021 में बाइडेन प्रशासन ने इसमें शामिल होने का फैसला लिया था। ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद यह फैसला पलट दिया गया।
भारत सरकार का स्पष्ट रुख: ‘हम कायम’
नई दिल्ली के वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के बाहर होने से
ISA की कार्यप्रणाली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सूत्रों ने कहा:
- ISA का 90% से ज्यादा फोकस ग्लोबल साउथ (एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) के देशों पर है।
- अमेरिका का योगदान वित्तीय या तकनीकी रूप से बहुत सीमित था।
- भारत और फ्रांस मिलकर संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे।
- 1 ट्रिलियन डॉलर निवेश लक्ष्य और सोलर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लक्ष्य बिना रुके आगे बढ़ेंगे।
सूत्रों ने जोर देकर कहा कि “ट्रंप का फैसला भारत के राष्ट्रीय सोलर मिशन या
ISA की योजनाओं को प्रभावित नहीं करेगा। हमारी सौर ऊर्जा यात्रा स्वतंत्र और मजबूत है।”
भारत की सोलर उपलब्धियां
भारत ने 2025 तक 100 गीगावॉट सोलर क्षमता का लक्ष्य पार कर लिया है।
2026-27 में यह 175 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है। ISA के तहत भारत ने अफ्रीका,
एशिया और प्रशांत द्वीपों के 30+ देशों में सोलर प्रोजेक्ट शुरू किए हैं।
निष्कर्ष: ISA मजबूत रहेगा
अमेरिका के बाहर होने की खबर के बावजूद ISA पर भारत का भरोसा अटल है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह संगठन अब और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा।
सौर ऊर्जा में भारत की लीडरशिप वैश्विक स्तर पर बनी रहेगी और ट्रंप के फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
क्लीन एनर्जी का भविष्य अभी भी उज्ज्वल है।