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आज 6 दिसंबर 2025 को पूरे देश में डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस (परिनिर्वाण दिवस) पर उनको याद किया जा रहा है — उनकी जन्म–मरण तिथि पर, उनकी अमूल्य सेवाओं और विचारों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) ने श्रद्धासुमन अर्पित किया और एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है: अब से प्रदेश में जहाँ–जहाँ आंबेडकर की मूर्तियाँ होंगी, उनके आसपास “सुरक्षात्मक बाउंड्री वॉल / सुरक्षा घेरा” बनाया जाएगा।
यह फैसला सिर्फ एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है — साथ ही, उन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जब कहीं–कहीं उनकी प्रतिमाओं के साथ दुर्भावनापूर्ण व्यवहार या तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आई थीं। The
श्रद्धांजलि सभा — कार्यक्रम और बयानों का सार
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाग लिया और आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
- सभा की शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बुद्ध वंदना और त्रिशरण पंचशील के पाठ से हुई। इससे यह संदेश गया कि आंबेडकर के विचार — सामाजिक न्याय, समानता, मानवता — केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक भी थे।
- योगी ने अपने संबोधन में कहा कि आंबेडकर के विचार, उनके सिद्धांत और उनकी दूरदृष्टि ही भारत के लोकतंत्र की नींव हैं।
नया ऐलान: मूर्तियों की सुरक्षा — क्यों ज़रूरी
हाल के सालों में कई जगहों पर आंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाने या तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आई हैं। उदाहरण के लिए:
- उत्तर प्रदेश के एक इलाके में किसी ने प्रतिमा की उंगली तोड़ दी थी, जिससे स्थानीय लोगों में रोष फैला। उन्होंने सुरक्षा बाउंड्री वॉल और CCTV की मांग की थी।
- पंजाब के बटाला और अमृतसर जैसे स्थानों में भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं कि जहाँ प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया गया।
ऐसे में, मुख्यमंत्री योगी का यह फैसला न केवल संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि मूर्तियों को सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से संरक्षित करने की दिशा में कदम है। सुरक्षा घेरा और बाउंड्री वॉल से संभावना है कि भद्दे हमले, तोड़फोड़, या अपमानजनक घटनाओं पर रोक लगेगी। यह उन तमाम लोगों को एक संदेश होगा — आंबेडकर के योगदान और उनकी स्मृति का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
सामाजिक और राजनीतिक मायने
- यह पहल यह दिखाती है कि सरकार उन प्रतीकों — मूर्तियों, स्मारकों — को महत्व दे रही है,
- जो हमारे राष्ट्र के इतिहास, संविधान और सामाजिक न्याय के संदेश का प्रतीक हैं।
- साथ ही, इस कदम से दलित समाज और अन्य सामाजिक पिछड़े वर्गों में भरोसा बढ़ने की संभावना है
- कि उनकी पहचान, उनकी महान विभूतियों का सम्मान कायम रहेगा।
- यह एक संवेदनशील राजनीतिक संकेत भी है — उन लोगों, समूहों या राजनैतिक दलों के लिए
- जो हमेशा से इस विवाद में रहे हैं
- कि आंबेडकर
- और उनके विचारों को कितना समुचित सम्मान मिलता है।
आगे क्या हो सकता है — चुनौतियाँ और उम्मीदें
- बाउंड्री वॉल बनाने और सुरक्षा की जिम्मेदारी जहाँ स्थानिक प्रशासन की होगी, वहीं यह देखना अहम होगा
- कि ये वॉल कितनी मजबूती और विश्वसनीयता के साथ बनाए जाएँ —
- ताकि बाहरी हमलों, भद्दे व्यवहार
- या तोड़फोड़ की घटनाओं को रोका जा सके।
- इसके साथ ही, सिर्फ भौतिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समाज में आंबेडकर के विचार —
- समानता, सामाजिक न्याय, दलितों व पिछड़ों के अधिकार —
- को भी सक्रिय रूप से याद रखना, समझाना और लागू करना ज़रूरी होगा।
- अगर यह पहल सही मायनों में लागू हुई, तो उत्तर प्रदेश में अन्य स्थलों, मंदिरों, स्मारकों
- , सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित व सम्मानजनक रवैया बढ़ेगा —
- जिससे सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बल मिलेगा।
निष्कर्ष
महापरिनिर्वाण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए श्रद्धांजलि अर्पण और आंबेडकर की मूर्तियों की सुरक्षा
के लिए “सुरक्षात्मक बाउंड्री वॉल
” बनाने के ऐलान ने एक सही दिशा की शुरुआत दिखाई है।
यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं — बल्कि सामाजिक सम्मान, संवेदनशीलता
और देश के उन महान विभूतियों
के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है
जिन्होंने हमें संविधान, न्याय, समानता और बराबरी का दर्शन दिया।