इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा फर्रुखाबाद की एसपी को अदालत में बैठने का आदेश – वकील की रिहाई तक न्याय प्रक्रिया का ऐतिहासिक घटनाक्रमघटना का संक्षिप्त परिचय14 अक्टूबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आरती सिंह को अदालत में तब तक बैठाए रखा, जब तक कि एक वकील की रिहाई नहीं हो गई
। यह फैसला बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि फर्रुखाबाद के अधिवक्ता अवधेश मिश्र को एसओजी ने हिरासत में ले लिया था। याचिकाकर्ता प्रीति यादव की ओर से कोर्ट में आरोप लगाया गया था कि उनके पति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और वकील को धमकाया तथा गिरफ्तार किया
गया न्यायिक प्रक्रिया और कोर्ट की नाराजगीजस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा मानते हुए एसपी आरती सिंह से सख्ती से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए एसपी और उनकी टीम को न्याय कक्ष छोड़ने से मना कर दिया,
और आदेश दिया कि वकील को पेश किए जाने तक वे अदालत में ही बैठे रहें। एसपी के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट रहा और उन्हें बुधवार तक व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने के आदेश दिए अवैध हिरासत और दबाव में बयानयाचिकाकर्ता ने पूरक हलफनामे में बताया कि उसके पति को 8 सितंबर की रात लगभग 9 बजे हिरासत में लिया गया
और 14 सितंबर की रात 11 बजे छोड़ा गया। वह आरोप लगाया गया कि पुलिस ने जबरन बयान लिखवाया कि हिरासत नहीं ली गई थी तथा कोई शिकायत नहीं है। पुलिस ने यही पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया, लेकिन अदालत ने इसे गम्भीर माना और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए
वकील के घर पर दबिश और तोड़फोड़अवधेश मिश्र, वकील जिनकी गिरफ्तारी हुई थी, के घर पर पुलिस ने दबिश दी, तोड़फोड़ की और उनके मोबाइल व कैमरे तक छीन लिए। अदालत ने इस कार्रवाई को भी गंभीरता से लिया और एसपी फर्रुखाबाद सहित कई अधिकारियों को व्यक्तिगत रुप से प्रकट होने का आदेश
दिया कोर्ट द्वारा कड़े निर्देशकोर्ट ने आदेश दिया कि किसी भी पुलिसकर्मी को याचिकाकर्ता प्रीति यादव से संपर्क या धमकी देने से रोका जाए। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों को अदालत में उपस्थित रहने का सख्त निर्देश दिया गया। अदालत ने पुलिस की कार्यशैली को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में माना और प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी
पुलिस की प्रतिक्रियाफतेहगढ़ पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि एसपी स्वेच्छा से 15 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित रहेंगी। हालांकि हाईकोर्ट के वकीलों ने आदेश को प्राथमिक दृष्टि से अवमानना का मामला मानते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है
उच्च न्यायालय का दृष्टिकोणइलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना एफआईआर के व्यक्ति को हिरासत में रखने को गंभीर मानते हुए पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट ने एसपी आरती सिंह से अनेक प्रश्न पूछे परंतु वे अदालत को संतुष्ट नहीं कर सकीं, जिससे अदालत की नाराजगी और बढ़ गई
प्रशासनिक हलकों में हलचलइस घटना ने उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन में हलचल मचा दी है। वरिष्ठ अधिकारियों पर न्यायिक अवमानना के आरोप लगने से सिस्टम में चेतावनी का संदेश गया है। कोर्ट की सख्ती ने प्रशासन को विवेकपूर्ण कार्यवाही करने को बाध्य किया है
यह घटना पुलिस प्रशासन, वकीलों एवं न्यायपालिका के संबंधों में पारदर्शिता और नियम पालन का प्रतीक बन गई है। हाईकोर्ट की सख्त कार्यवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए हैं
