यह घटना गोरखपुर की है, जिसमें एक विकलांग व्यक्ति की पेंशन को लेकर उसके भाई और भाभी के बीच लगातार विवाद चलता था। शराब की लत ने पूरे परिवार को अपने शिकंजे में कस लिया था, जिसकी वजह से एक छोटी-सी रकम के लिए हत्या कर दी गई। इस पूरे मामले में आरोपी ने पुलिस पूछताछ में जो कबूलनामा किया, वह समाज के लिए बड़ी चिंता की बात है।
गोरखपुर के एक मोहल्ले में रहने वाले रमाशंकर सिंह (काल्पनिक नाम) एक विकलांग व्यक्ति थे, जिन्हें सरकार द्वारा पेंशन मिलती थी। इस पेंशन से उनका खर्च चलता था, लेकिन उनके भाई और भाभी को शराब की बुरी लत थी। आरोपी भाई ने खुद कबूल किया कि उसने रुपए खर्च करके विकलांगता का सर्टिफिकेट दिलवाया था, जिससे रमाशंकर को पेंशन मिलने लगी। इसके बदले में उसने आधी पेंशन देने का वादा करवाया था।
पेंशन की रकम आते ही पति-पत्नी (यानी आरोपी और उसकी पत्नी) रमाशंकर से पैसे मांगते और शराब खरीदते थे। कई बार मना करने पर झगड़ा होता था। घटना वाले दिन भी पैसे न देने पर विवाद बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
पुलिस ने जब मामले की जांच की, तो पाया कि आरोपी शराब की लत में डूबा हुआ था। उसने कबूल कर लिया कि पैसे न देने पर उसने गुस्से में रमाशंकर की हत्या कर दी। वारदात को छिपाने के लिए लाश को भी ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
मोहल्ले में पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों को पता चला कि इस परिवार के कई सदस्य शराब के लती हैं। पेंशन की रकम भी फिजूलखर्ची और शराब में खप जाती थी। शर्मनाक बात यह रही कि एक छोटी सी रकम और शराब की लत ने परिवार का सुख-चैन छीन लिया और एक जान ले ली।
इस घटना से यह स्पष्ट है कि शराब की लत किस हद तक इंसान को गिरा सकती है। सरकारी योजनाओं का लाभ तभी मिलता है जब समाज में जागरूकता और नैतिकता बनी रहे। परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर नशाखोरी के खिलाफ अभियान छेड़ना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
गोरखपुर की इस घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर समय रहते शराब और नशे पर काबू न पाया जाए, तो घर-परिवार और सामाजिक ताना-बाना टूट सकता है। सरकारी सुविधाएं तभी सार्थक होंगी, जब उनका सही उपयोग किया जाए और सामाजिक बुराइयों से बचा जाए।