उत्तर प्रदेश में SIR
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन संशोधन (SIR – Special Intensive Revision) के तहत जारी मतदाता सूची पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR लिस्ट में एक एंट्री को लेकर भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लिस्ट में ‘भगवानदास के घर मो. अफजल’ रह रहे हैं। अखिलेश ने इसे भाजपा की ‘मजाक’ करार देते हुए कहा कि “कालनेमि की बात करने वालों का काल बनकर आएगा कालनेमि”। यह बयान यूपी की सियासत में नया विवाद खड़ा कर चुका है।
अखिलेश यादव का पूरा बयान
अखिलेश यादव ने अपने ऑफिशियल X (ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट किया:
“SIR लिस्ट में ‘भगवानदास के घर मो. अफजल’ रह रहे हैं। लगता है भाजपावालों ने मजाक किया है। जो लोग कालनेमि की बात करते हैं, उनका काल बनकर आएगा कालनेमि। सपा परिवार की एकता और जनता का विश्वास भाजपा की साजिशों से कहीं ज्यादा मजबूत है।”
*अखिलेश ने SIR प्रक्रिया को ‘चुनावी धांधली’ का हिस्सा बताया और कहा कि भाजपा मतदाता सूची में हेरफेर कर अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के लोगों को वंचित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर मुस्लिम और दलित नामों को गलत तरीके से दर्ज किया गया या हटाया गया। ‘भगवानदास के घर मो. अफजल’ वाली एंट्री को उन्होंने भाजपा की ‘सांप्रदायिक मानसिकता’ का सबूत बताया।
SIR लिस्ट विवाद का बैकग्राउंड
उत्तर प्रदेश में SIR (विशेष गहन संशोधन) के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी है और गलत/फर्जी नामों को हटाने के लिए की जा रही है। लेकिन विपक्षी दल इसे ‘चुनावी हेरफेर’ बता रहे हैं। अखिलेश यादव ने पहले भी SIR को ‘मतदाता सूची से मुस्लिमों को हटाने की साजिश’ करार दिया था। इस एंट्री को लेकर अब सपा ने नया हमला बोला है।
भाजपा का जवाब
भाजपा प्रवक्ताओं ने अखिलेश के बयान को ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया। भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “अखिलेश जी को मजाक समझने की आदत है। SIR में अगर कोई गलती हुई है तो सुधार हो जाएगा, लेकिन वे इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।” भाजपा ने दावा किया कि SIR से फर्जी वोटर हट रहे हैं, जो सपा के लिए फायदेमंद थे।
सोशल मीडिया पर बवाल
अखिलेश के पोस्ट के बाद #KalnemikaKaal और #BhagwandasMoAfzal जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। सपा समर्थकों ने इसे भाजपा की ‘नाकामी’ बताया, जबकि भाजपा समर्थकों ने अखिलेश पर ‘सांप्रदायिक राजनीति’ का आरोप लगाया।
कई यूजर्स ने लिस्ट की स्क्रीनशॉट शेयर कर बहस छेड़ दी।
राजनीतिक प्रभाव
यह विवाद यूपी में आगामी निकाय चुनावों और 2027 विधानसभा चुनावों से पहले सियासी तापमान बढ़ा रहा है।
अखिलेश यादव इसे अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के साथ जोड़कर सपा की एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर भाजपा इसे ‘विपक्ष का डर’ बता रही है।
अखिलेश यादव का ‘भगवानदास के घर मो. अफजल’ वाला तंज और ‘कालनेमि’ वाली चेतावनी यूपी की राजनीति में
नया दौर शुरू कर चुकी है। SIR लिस्ट पर विवाद अब सिर्फ चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रहा,
बल्कि सांप्रदायिक और सामाजिक ध्रुवीकरण का हथियार बन गया है। निर्वाचन आयोग को
अब इस एंट्री की जांच करनी होगी। आने वाले दिनों में इस विवाद पर और बयानबाजी देखने को मिलेगी।
क्या यह SIR प्रक्रिया को प्रभावित करेगा या सिर्फ राजनीतिक बवाल रहेगा
