एयर इंडिया FY26 में
एयर इंडिया, टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस की संयुक्त उद्यम कंपनी, वित्त वर्ष 2026 (मार्च 2026 तक) में रिकॉर्ड घाटे की ओर बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी को कम से कम ₹15,000 करोड़ ($1.6 बिलियन) का नुकसान होने की आशंका है। यह घाटा पिछले साल जून में अहमदाबाद से लंदन जा रहे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की घातक दुर्घटना और पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरलाइंस के लिए एयरस्पेस बंद करने से हुआ है। इन घटनाओं ने एयर इंडिया के टर्नअराउंड प्लान को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और खराब हो गई है।
अहमदाबाद क्रैश का प्रभाव
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI171 (बोइंग 787-8) ने टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश कर दिया। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई, जिसमें सभी 12 क्रू मेंबर और 229 यात्री शामिल थे। इस दुर्घटना के बाद एयर इंडिया ने “सेफ्टी पॉज” लागू किया और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 15% कटौती की। इससे यात्री विश्वास घटा, बुकिंग्स प्रभावित हुईं और राजस्व में भारी गिरावट आई। जांच में विमान की पुरानी तकनीकी खराबियां (जैसे इन-फ्लाइट फायर) सामने आईं, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा को गहरा झटका लगा।
पाकिस्तान एयरस्पेस बंदी से अतिरिक्त नुकसान
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। यह बंदी अब 10 महीने से अधिक समय से जारी है (फरवरी 2026 तक बढ़ाई गई)। इससे यूरोप और अमेरिका की उड़ानें लंबी हो गईं, ईंधन खर्च बढ़ा और परिचालन लागत में उछाल आया। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पहले ही कहा था कि एयरस्पेस बंदी से कंपनी को सालाना ₹4,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इस बंदी से लगभग 800 साप्ताहिक उड़ानें प्रभावित हुईं, जिसने कंपनी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया।
टाटा ग्रुप का नया प्लान: लीडरशिप बदलाव और टर्नअराउंड रिव्यू
टाटा ग्रुप अब एयर इंडिया के टर्नअराउंड प्लान पर असंतुष्ट है। सीईओ कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल जून 2027 तक है, लेकिन टाटा संस चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने वैश्विक एविएशन एग्जीक्यूटिव्स से बातचीत शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विल्सन का कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंड नहीं किया जाएगा और जल्द ही लीडरशिप चेंज हो सकता है। कंपनी ने ऑपरेशनल ब्रेकईवन टारगेट मिस किया है, जिससे टाटा ग्रुप ने नए प्लान पर विचार शुरू किया है। एयर इंडिया ने टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से ₹10,000 करोड़ की अतिरिक्त मदद मांगी है।
FY25 में भी बड़ा घाटा
FY25 में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मिलकर ₹10,859 करोड़ का घाटा दर्ज किया,
जो टाटा ग्रुप का सबसे बड़ा घाटा देने वाला वर्टिकल था।
राजस्व ₹78,636 करोड़ रहा, लेकिन क्रैश, एयरस्पेस बंदी और सप्लाई चेन डिले से स्थिति बिगड़ी।
आगे क्या?
एयर इंडिया के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। टाटा ग्रुप अब फ्लीट एक्सपैंशन, सेफ्टी इम्प्रूवमेंट और
कॉस्ट कंट्रोल पर फोकस कर रहा है। यदि लीडरशिप चेंज होता है, तो
कंपनी का टर्नअराउंड प्लान नई दिशा ले सकता है।
भारतीय एविएशन सेक्टर में यह घटनाएं यात्री विश्वास और बाजार संरचना पर सवाल उठा रही हैं।