एम्स गोरखपुर
गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पूर्व कार्यकारी निदेशक (ईडी) डॉ. सुरेखा किशोर से जुड़े विवादास्पद प्रकरण में नया मोड़ आया है। एम्स प्रबंधन ने पूर्व ईडी के दो बेटों को नौकरी देने और घर बैठे सैलरी दिलाने के मामले की जांच के लिए ऋषिकेश एम्स में बुलाए गए 12 डॉक्टरों को अनुमति दे दी है। इन डॉक्टरों के साथ एम्स गोरखपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता भी साथ जाएंगे। जांच 11 और 12 मार्च 2026 को होगी, जहां डॉक्टरों को अपने बयान दर्ज कराने हैं। एम्स मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने पुष्टि की है कि वकील को साथ ले जाने की अनुमति मिल चुकी है।
पूर्व ईडी सुरेखा किशोर प्रकरण: क्या है पूरा मामला?
डॉ. सुरेखा किशोर एम्स गोरखपुर की तत्कालीन कार्यकारी निदेशक थीं। उनके कार्यकाल में आरोप लगा कि उन्होंने अपने दो बेटों को एम्स में नौकरी दिलाई और बिना ड्यूटी दिए सैलरी दिलाई। इस मामले में केंद्रीय स्तर पर जांच शुरू हुई, जिसके बाद डॉ. सुरेखा को हटा दिया गया। जांच एजेंसियों ने एम्स गोरखपुर के कई डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की। अब एम्स ऋषिकेश में जांच टीम ने गोरखपुर से 12 डॉक्टरों को बयान के लिए बुलाया है। ये डॉक्टर उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने प्रकरण में गवाही दी थी या जिनके नाम जांच में आए थे।
12 डॉक्टरों की टीम और अधिवक्ता की मौजूदगी
एम्स गोरखपुर प्रबंधन ने 12 डॉक्टरों को ऋषिकेश जाने की अनुमति दे दी है। इन डॉक्टरों के साथ एम्स के वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एन. शुक्ल भी जाएंगे। अधिवक्ता जांच टीम के सामने डॉक्टरों के पक्ष में खड़े होंगे और उनका प्रतिनिधित्व करेंगे। डॉ. अरूप मोहंती ने बताया कि वकील को साथ ले जाने की अनुमति मिल गई है, ताकि डॉक्टरों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनका पक्ष मजबूती से रखा जा सके। यह कदम एम्स गोरखपुर में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
जांच का महत्व और संभावित परिणाम
यह जांच पूर्व ईडी सुरेखा किशोर के कार्यकाल में हुए कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है। मुख्य आरोप हैं:
- बेटों को अनुचित तरीके से नौकरी देना
- बिना काम किए सैलरी जारी करना
- पद का दुरुपयोग
11 और 12 मार्च को ऋषिकेश में डॉक्टरों के बयान दर्ज होने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार होगी। यदि आरोप सिद्ध हुए तो पूर्व ईडी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। एम्स गोरखपुर में यह मामला काफी समय से चर्चा में है और कर्मचारियों के बीच भी तनाव का कारण बना हुआ है।
एम्स गोरखपुर का बयान और आगे की तैयारी
एम्स मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने कहा कि संस्थान
जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। डॉक्टरों को ऋषिकेश जाने की
अनुमति दे दी गई है और अधिवक्ता की मौजूदगी से उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकार सुनिश्चित होंगे।
एम्स प्रबंधन ने सभी डॉक्टरों से अपील की है कि वे जांच में सहयोग करें ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मुरादाबाद नहीं, मुरादाबाद से जुड़े इस प्रकरण में एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टरों की टीम ऋषिकेश जा रही है।
अधिवक्ता वी.एन. शुक्ल के साथ
डॉक्टर अपना पक्ष रखेंगे। यह जांच पूर्व ईडी सुरेखा किशोर के कार्यकाल की सच्चाई सामने लाएगी।
संस्थान में पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ी है। जांच के नतीजे आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
