गोरखपुर, महदेवा, भैंसा बाजार, सतुआ भार, खजनी इत्यादि क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से मिलावटी पनीर बनाने का धंधा ज़ोरों पर है । यहां के स्थानीय व्यापारी और दूध विक्रेता सस्ती दर में मिलावटी पनीर तैयार करते हैं, जिसे होटल्स, फुटकर दुकानों और मिठाई बाजारों में कमीशन पर सप्लाई किया जाता है।
यह कारोबार इतना सघन है कि लगभग 50 से अधिक ठिकानों पर रोजाना 20-25 क्विंटल मिलावटी पनीर तैयार होता है, जो कई जिलों तक भेजा जाता है।मिलावटी पनीर बनाने की प्रक्रिया अत्यंत हानिकारक एवं अनैतिक है। इसमें जहरीले केमिकल, मिल्क पाउडर, डिटर्जेंट, रीठा व्हाइटनर, सैकरीन और यहां तक कि एसेन्स व गुलाबजल का भी इस्तेमाल किया जाता है,
जिससे पनीर दिखने में सफेद और ताजगी भरा लगे। कुछ फैक्ट्रियों में हरियाणा के मेवात से कारीगर बुलाए जाते हैं जो रात में पनीर बना उसको सुबह-सुबह बाइक या अन्य वाहनों के माध्यम से मंडी और शहरों तक पहुंचाते हैं।यह मिलावटी पनीर गोरखपुर के अलावा आजमगढ़, संतकबीरनगर, महराजगंज, आंबेडकरनगर और बिहार तक सप्लाई होता है
। मिठाई की दुकानों, घटिया होटल, तथा सड़क किनारे लगने वाले ठेलों पर सबसे ज़्यादा डिमांड रहती है। त्योहारों के समय तो खपत दुगुनी हो जाती है—जहां आम दिनों में लगभग 120 क्विंटल पनीर बिकता है, वहीं त्योहारों में यह आंकड़ा 250 क्विंटल तक पहुंच जाता है ।एजेंट कमीशन के खेल में होटल और फुटकर दुकानदार कम कीमत में मिलावटी पनीर खरीदते हैं
और ग्राहकों के भोजन में इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोगों की सेहत पर संकट मंडराता है। औसतन मिलावटी पनीर की कीमत 225 से 275 रुपये क्विंटल है, जबकि असली पनीर का रेट बाजार में 300 रुपये क्विंटल तक है। कमीशन की लालच में बहुत से व्यापारी और दुकानदार बिना गुणवत्ता की जांच किए यह पनीर आसानी से खरीद लेते हैं।खाद्य विभाग की टीमें समय-समय पर छापेमारी करती हैं।
बीते दिनों गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र की एक फैक्ट्री में 250 किलोग्राम मिलावटी पनीर और 800 लीटर मिलावटी दूध बरामद किया गया, जिसे विभाग ने मौके पर ही नष्ट कर दिया। लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में कई बार ऐसी फैक्ट्रियां दोबारा शुरू हो जाती हैं,
जिससे समस्या विकराल रूप ले लेती है।स्थानीय लोगों ने भी फैक्ट्रियों में इस्तेमाल हो रहे केमिकल्स की शिकायत की थी, कड़ी बदबू और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के कारण अनेक लोग बीमार हो चुके हैं। पनीर का कारोबार ऐसा है, जिसमें एक बार फैक्ट्री बंद होने के बावजूद कुछ दिनों बाद फिर से गुपचुप चालू हो जाती है और उसी तेजी से मिलावटी पनीर का उत्पादन जारी रहता है। अभियुक्तों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम 2006 की धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है,
कुछ को जेल भी भेजा गया है, लेकिन पुलिस-प्रशासन की सक्रियता के बावजूद इस मिलावट का जाल लगातार फैलता जा रहा है।मिलावटी पनीर सप्लाई करने वाले एजेंट नियमित रूप से मंडियों और होटल्स में ग्राहकों की मांग के मुताबिक पनीर आपूर्ति करते हैं। इसमें उन्हें हर क्विंटल पर कमीशन मिलता है—
जिसका फायदा उठाकर वे अपने क्षेत्र के होटल, मिठाई दुकानों, और फुटकर बाजारों से संपर्क बनाए रखते हैं। मिलावटी पनीर कारोबारियों की रोजाना एक लाख से ऊपर की कमाई हो जाती है, जबकि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जाता है।
कुल मिलाकर गोरखपुर, महदेवा, भैंसा बाजार, सतुआ भार, खजनी, और आसपास के इलाके मिलावटी पनीर के घातक कारोबार के केंद्र बन चुके हैं प्रशासन को चाहिए कि वह इस पर लगाम कसने के लिए और सख्त कदम उठाए, छापेमारी की संख्या बढ़ाए और दोषियों को कड़ी सजा दिलाए ताकि आम जनता की सेहत सुरक्षित रह सके।
