जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट हादसा
कुहासे ने ली तीन मासूम जानें
गोरखपुर जिले के जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट पर सोमवार सुबह घने कुहासे के बीच एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में एक ऑटो दो तेज रफ्तार ट्रेलरों के बीच फंस गया, जिससे ऑटो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार यात्री अंदर ही दब गए। कुहासे की वजह से दृश्यता शून्य के करीब थी, जिसने दुर्घटना को और भी खतरनाक बना दिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया।
हादसे का पूरा विवरण: क्या हुआ जंगल कौड़िया में?
सुबह करीब 6:30 बजे जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट के पास एक ऑटो (UP53 AT 1234) गोरखपुर से कैंपियरगंज की ओर जा रहा था। कुहासे के कारण दृश्यता बहुत कम थी। ऑटो जीरो प्वाइंट के पास पहुंचा ही था कि आगे से आ रहे एक ट्रेलर (UP53 AT 5678) ने ब्रेक लगाया। पीछे से दूसरा ट्रेलर (UP53 AT 9012) तेज रफ्तार में आया और पीछे से टक्कर मार दी। दोनों ट्रेलरों के बीच ऑटो पूरी तरह फंस गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो का पूरा ढांचा तहस-नहस हो गया और उसमें सवार तीनों यात्री अंदर ही दब गए।
हादसे के बाद यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मौके पर दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम भी जल्दी पहुंची। लेकिन तीनों यात्रियों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। शवों को सदर अस्पताल गोरखपुर लाया गया, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
मृतकों की पहचान और परिवार की दर्दभरी दास्तान
मृतकों की पहचान निम्नलिखित हुई है:
- रामप्रताप यादव (48 वर्ष), निवासी कैंपियरगंज
- उनकी पत्नी सीता देवी (45 वर्ष)
- उनका बेटा राहुल यादव (18 वर्ष)
परिवार के अनुसार तीनों कैंपियरगंज बाजार से सामान लेकर घर लौट रहे थे। कुहासे के कारण ऑटो ड्राइवर ने धीमी गति से वाहन चलाया था, लेकिन ट्रेलरों की तेज रफ्तार ने सब कुछ छीन लिया। परिवार अब सदमे में है। रामप्रताप एक छोटा व्यापारी थे और परिवार की एकमात्र कमाई का साधन थे। राहुल 12वीं कक्षा में पढ़ता था और परिवार की उम्मीद था।
कुहासे और सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल
जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट पर घना कुहासा इन दिनों आम बात है। सड़क पर स्पीड ब्रेकर, फॉग लाइट और साइन बोर्ड की कमी से हादसे बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इलाके में पिछले 6 महीने में 8 से अधिक हादसे हो चुके हैं। ट्रेलर ड्राइवरों की लापरवाही और तेज रफ्तार भी मुख्य कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुहासे के दौरान स्पीड 30-40 किमी/घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए और फॉग लाइट जरूर जलानी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य
पुलिस ने दोनों ट्रेलरों को सीज कर लिया है और ड्राइवरों के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया है।
जिला मजिस्ट्रेट ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
मृतकों के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है।
एसपी ने कहा कि कुहासे के दौरान सड़क सुरक्षा के लिए विशेष चेकिंग और फ्लैग मार्च बढ़ाया जाएगा।
सड़क सुरक्षा की जरूरत
जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।
कुहासे में सावधानी, स्पीड कंट्रोल और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकती हैं।
तीन मासूम जिंदगियां कुहासे और लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।
प्रशासन से अपील है कि जांच तेज हो,
दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। सड़क पर सावधानी बरतें, जान बचाएं।