चंद्रभान जी की 2 महीने पुरानी चेतावनी
गोरखपुर आमी नदी आज मौत का पर्याय बन गई है। नदी का पानी इतना जहरीला हो चुका है कि हजारों मछलियाँ तैरती हुई मरी मिलीं, पानी का रंग काला पड़ गया और तेज़ बदबू पूरे इलाके में फैल गई। स्थानीय लोग अब नदी का पानी छूने से भी डर रहे हैं। लेकिन इस भयावह स्थिति की सबसे बड़ी बात ये है कि सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभान जी पिछले कई महीनों से लगातार चेता रहे थे – “आमी नदी मर रही है, अगर अभी नहीं चेते तो पूरा इलाका बीमार पड़ जाएगा।”
फिशरमैन चंद्रभान निशाद जी ने सबसे पहले कब और कैसे दी थी चेतावनी?
पर्यावरण और जल-संरक्षण के लिए मशहूर हैं, पिछले 2-3 महीने से लगातार ग्राम सभाओं, सोशल मीडिया और स्थानीय अखबारों के जरिए चेता रहे थे। उन्होंने बताया था कि:
- नदी किनारे अवैध फैक्टरियों से केमिकल युक्त गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है।
- आर्सेनिक, लेड और मरकरी जैसी भारी धातुओं की मात्रा पानी में कई गुना बढ़ चुकी है।
- अगर अभी नहीं रोका गया तो मछलियाँ मरेंगी, खेत बंजर होंगे और लोगों को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियाँ घेर लेंगी।
उन्होंने कई बार जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत कैसे करें – चंद्रभान निषाद भैया की तरह अपनी आवाज़ बुलंद करें
आज के ज़माने में अगर कोई अफसर नहीं सुन रहा, कोई फैक्ट्री जहर फैला रही है या आपके गाँव-शहर में कोई समस्या है तो सबसे ताकतवर हथियार है – सोशल मीडिया शिकायत के माध्यम से दी लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
अब सच सामने आया – नदी में मिले खतरनाक तत्व
हाल ही में स्वतंत्र लैब टेस्ट और स्थानीय मछुआरों की शिकायत के बाद जब जांच हुई तो रिपोर्ट ने सबको हिला दिया:
- आर्सेनिक: WHO मानक से 18 गुना ज्यादा
- लेड: 22 गुना ज्यादा
- मरकरी और कैडमियम भी घातक स्तर पर
- pH लेवल इतना कम कि पानी अम्लीय हो चुका है
कुछ दिन पहले हजारों मछलियाँ मरीं, नदी किनारे बकरियाँ-गायें भी बीमार पड़ने की खबरें आईं।
फिशरमैन चंद्रभान निशाद जी की मुहिम ने अब रंग दिखाया
लगातार आवाज के कारण अब प्रशासन हरकत में आया है:
*फिशरमैन चंद्रभान निशाद कहते हैं, “ये जीत नहीं, शुरुआत है। अभी नदी को बचाना है। जब तक सभी फैक्टरियाँ बंद नहीं होतीं और पानी साफ नहीं होता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
लोगों को क्या करना चाहिए? फिशरमैन चंद्रभान निशाद जी की सलाह
- नदी का पानी बिल्कुल न छुएं, न नहाने-धोने में इस्तेमाल करें
- मछली बाजार से मछली न खरीदें
- बच्चों को नदी किनारे न जाने दें
- अगर त्वचा पर खुजली या बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
निष्कर्ष
आजब कोई एक व्यक्ति महीनों पहले सच बोलता है और कोई सुनता नहीं, फिर वही सच सबके सामने
आता है – तो ये बहुत दुखद होता है। फिशरमैन चंद्रभान निशाद जी जैसे लोग ही
समाज का असली चौकीदार होते हैं।
आज आमी नदी की ये सबक दे रही है कि अगर हमने अभी नहीं चेते तो कल बहुत देर हो जाएगी।