हाल ही में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के बीच नया व्यापार युद्ध छिड़ गया है। इसका केंद्रबिंदु बने हैं दुर्लभ खनिज, जिन्हें “रेयर अर्थ मेटल्स” भी कहा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर 2025 को चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने की प्रतिक्रिया में चीन से आने वाले सभी वस्तुओं पर 100% अतिरिक्त आयात शुल्क
(टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। यह टैक्स 1 नवंबर 2025 से लागू होगा और मौजूदा टैक्स से अलग होगा क्या है दुर्लभ खनिजों का महत्व?दुर्लभ खनिज, यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स, कुल 17 प्रकार के रासायनिक तत्व हैं, जिनका उपयोग आज की तकनीकी दुनिया में मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहनों, कंप्यूटर चिप्स, लेज़र और विशेषकर रक्षा उपकरण बनाने में होता है।
दुनिया भर में इनकी सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा चीन के पास है — खनन में 70%, प्रोसेसिंग में 90% और चुम्बक निर्माण में 93% तक चीन की हिस्सेदारी है ऐसे में किसी भी देश के लिए चीन के विकल्प तलाशना बहुत कठिन है।चीन के नए निर्यात नियमचीन ने अक्टूबर में ऐलान किया कि कोई भी विदेशी कंपनी या देश जो चीनी तकनीक या चीनी खनिजों से बने उत्पादों का उपयोग करता है,
उसे निर्यात से पहले लाइसेंस लेना होगा। सेना और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन नियमों के अनुसार, सिर्फ वे कंपनियां निर्यात की अनुमति पा सकेंगी जो यह सुनिश्चित करें कि इन खनिजों या उत्पादों का सैन्य इस्तेमाल नहीं होगा चीन का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। मगर पश्चिमी देश इसे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव की रणनीति मान रहे हैं।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और असरअमेरिका ने चीन की इन पाबंदियों को “आक्रामक” और “दुनिया को बंधक बनाने की कोशिश” बताया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन की इन चालों से विश्व व्यापार अस्थिर हो रहा है, और अमेरिका के पास इनके जवाब में कठोर कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह टैक्स मौजूदा टैक्स के ऊपर लगेगा, जिससे चीन से आयातित वस्तुएं कई गुना महंगी हो जाएंगी
कई अमेरिकी उत्पादक जैसे इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां, चिप निर्माता और रक्षा क्षेत्र इससे सीधे प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही, ट्रंप सरकार ने भी “क्रिटिकल सॉफ़्टवेयर” के निर्यात पर रोक की घोषणा की।वैश्विक व्यापार पर प्रभावचीन और अमेरिका के बीच इस व्यापार युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
अमेरिकी टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए कच्चा माल और महत्वपूर्ण पुर्जे महंगे हुए हैं। कई कंपनियों को अपना उत्पादन रोकना या घटाना पड़ा। साथ ही, निवेशकों में घबराहट दिखी और शेयर मार्केट में गिरावट आई उधर, चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिए
और अमेरिकी जहाज़ों से संबंधित नई फीस लागू की। खास तौर पर अमेरिकी चिप निर्माताओं और बंदरगाहों को निशाना बनाया गया भारत और दुनिया के लिए क्या मायने?विशेषज्ञों की राय में अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से भारत जैसे देशों को फायदा भी हो सकता है।
जब अमेरिकी बाज़ार में चीनी सामान ज्यादा महंगे होंगे, तो भारतीय निर्यातकों के लिए संभावना खुल सकती है। साथ ही, वैश्विक कंपनियां अब भारत, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम जैसे देशों से रेयर अर्थ सप्लाई के विकल्प तलाश सकती हैं
भविष्य क्या?मौजूदा हालात में ट्रंप-शी के बीच होने वाली एशिया पैसिफिक इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस (APEC) की बैठक भी खतरे में है। ट्रंप ने कहा कि चीन की कार्रवाई के बाद इस बैठक के लिए कोई औचित्य नहीं बचता।विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों देश बातचीत से समाधान नहीं निकालते
, तो पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, रक्षा और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भारी उथल-पुथल आ सकती है। आम उपभोक्ता को भी महंगे उत्पादों का सामना करना पड़ेगा फिलहाल, सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि नवंबर में जब यह नया टैक्स लागू होगा, तब दोनों देश पीछे हटते हैं या व्यापार युद्ध और बढ़ता है।
