कोलकाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यता का स्वाभाविक रूप है। भागवत ने अपने भाषण में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता और एकता से जोड़ा। यह बयान सामाजिक और राजनीतिक बहस को नई दिशा दे रहा है। मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र का मतलब सभी को साथ लेकर चलना है,
जहां हर व्यक्ति सम्मानित हो। यह भाषण आरएसएस की विचारधारा को आगे बढ़ाने और समाज में एकता का संदेश देने वाला है। भागवत ने कहा कि भारत की सभ्यता हजारों सालों से हिंदू राष्ट्र के रूप में फली-फूली है, जहां विविधता में एकता है। यह बयान 23 दिसंबर 2025 को दिया गया, जब देश में सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर चर्चाएं तेज हैं।
मोहन भागवत आरएसएस के प्रमुख हैं और उनके बयान हमेशा ध्यान खींचते हैं। यह भाषण पश्चिम बंगाल में आरएसएस की गतिविधियों को मजबूत करने का हिस्सा लग रहा है। भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे भारतीय सभ्यता की जड़ों को समझें और एकजुट रहें। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
कुछ ने सराहना की, तो कुछ ने सवाल उठाए। आरएसएस प्रमुख का यह संदेश राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित है। इस ब्लॉग में हम मोहन भागवत के बयान की पूरी डिटेल्स, मुख्य अंश, सांस्कृतिक महत्व, प्रतिक्रियाएं और प्रभाव बताएंगे। यदि आप सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में रुचि रखते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है।
मोहन भागवत का भाषण: हिंदू राष्ट्र की व्याख्या
कोलकाता के कार्यक्रम में मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर विस्तार से बात की। मुख्य अंश:
- हिंदू राष्ट्र कोई नई बात नहीं।
- भारत की सभ्यता का स्वाभाविक रूप।
- सहिष्णुता और एकता का प्रतीक।
- सभी धर्मों का सम्मान।
- विविधता में एकता।
- युवाओं से अपील।
भागवत ने कहा, “हिंदू राष्ट्र भारत की आत्मा है।”
सांस्कृतिक महत्व: भारत की विरासत
भागवत ने हिंदू राष्ट्र को भारत की सभ्यता से जोड़ा:
- हजारों सालों की विरासत।
- वसुधैव कुटुंबकम की भावना।
- धर्मनिरपेक्षता का सच्चा रूप।
- सामाजिक सद्भाव।
- राष्ट्रीय एकता।
- सांस्कृतिक पहचान।
यह व्याख्या आरएसएस की विचारधारा को आगे बढ़ाती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव: बहस गर्म
यह बयान से:
- राजनीतिक बहस।
- विपक्ष की आलोचना।
- समर्थकों की सराहना।
- सोशल मीडिया वायरल।
- युवा और बुद्धिजीवी चर्चा।
- राष्ट्रीय एकता पर फोकस।
भागवत का बयान विचारधारा को मजबूत करेगा।

प्रतिक्रियाएं: सराहना और आलोचना
बयान पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं:
- आरएसएस समर्थक: सराहना।
- विपक्ष: सांप्रदायिकता का आरोप।
- जनता: मिश्रित, कुछ सहमत।
- बुद्धिजीवी: सांस्कृतिक बहस।
- मीडिया: कवरेज।
- युवा: जागरूकता।
यह बयान बहस छेड़ रहा है।
आरएसएस का संदेश: एकता और सद्भाव
आरएसएस प्रमुख के बयान से संदेश:
- हिंदू राष्ट्र समावेशी।
- सभी का सम्मान।
- सांस्कृतिक एकता।
- समाज जागरूक हो।
- युवा आगे आएं।
- राष्ट्रीयता मजबूत।