सारनाथ (वाराणसी):‘
वाराणसी। सारनाथ में बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के उद्देश्य से धम्मचक्क पूजा 2026 का भव्य आयोजन तय हो गया है। 19 दिसंबर 2025 को यह फैसला लिया गया। धम्मचक्क पूजा बुद्ध के पहली उपदेश की स्मृति में मनाई जाती है, जहां उन्होंने सारनाथ में धम्म चक्र प्रवर्तन किया था। यह आयोजन लाखों अनुयायियों को एकजुट करेगा और बौद्ध धर्म के संदेश को फैलाएगा। आयोजन में ध्यान, प्रवचन, पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से प्रेरित यह कार्यक्रम सामाजिक समानता और न्याय पर फोकस करेगा। सारनाथ विश्व धरोहर स्थल होने से आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है। यह कार्यक्रम बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक और सामाजिक एकता का प्रतीक बनेगा।
आयोजन का उद्देश्य: बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय
यह आयोजन बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान में दिए संदेश ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ से प्रेरित है। मुख्य उद्देश्य:
- बौद्ध धर्म के संदेश फैलाना।
- सामाजिक समानता और न्याय।
- बहुजन समाज की एकता।
- बुद्ध के उपदेशों की स्मृति।
- युवाओं को बौद्ध दर्शन से जोड़ना।
आयोजन से लाखों लोग लाभान्वित होंगे।
धम्मचक्क पूजा का महत्व: बुद्ध का पहला उपदेश
धम्मचक्क पूजा बुद्ध के सारनाथ में दिए पहली उपदेश की याद में मनाई जाती है। मुख्य बातें:
- बुद्ध ने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग बताया।
- सारनाथ में धम्म चक्र प्रवर्तन।
- विश्व में बौद्ध धर्म का प्रचार।
- आध्यात्मिक शांति और करुणा का संदेश।
- अनुयायियों के लिए पवित्र दिवस।
यह आयोजन इस महत्व को जीवंत करेगा।
आयोजन की तैयारी: भव्य और बड़े स्तर पर
2026 का आयोजन भव्य होगा। मुख्य तैयारी:
- सारनाथ के मुख्य स्थलों पर कार्यक्रम।
- ध्यान सत्र और प्रवचन।
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।
- लाखों अनुयायी शामिल।
- अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अनुयायी आमंत्रित।
कमेटी ने कहा कि तैयारी जोरों पर है।
बहुजन समाज पर प्रभाव: एकता और जागरूकता
यह आयोजन बहुजन समाज के लिए महत्वपूर्ण:
- सामाजिक न्याय का संदेश।
- आंबेडकर विचारों का प्रचार।
- युवाओं में जागरूकता।
- समानता और भाईचारा।
- बौद्ध धर्म से जुड़ाव।
आयोजन से समाज मजबूत होगा।
सारनाथ का महत्व: विश्व धरोहर स्थल
सारनाथ बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है:
- धम्म चक्र प्रवर्तन स्थल।
- स्तूप और म्यूजियम।
- पर्यटक आकर्षण।
- आयोजन से पर्यटन बढ़ेगा।
- अंतरराष्ट्रीय महत्व।