जेल में ऐसी गुजरी पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की पहली रात: चश्मा टूटा, रातभर टहलते रहे, सोने की कोशिश की लेकिन नींद नहीं आई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल (IPS) अमिताभ ठाकुर की जेल में पहली रात बेहद दर्दनाक रही। 8 दिसंबर 2025 को लखनऊ-गोरखपुर ट्रेन से गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया। 11 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में उनकी पहली रात में चश्मा टूट गया, वे रातभर टहलते रहे और सोने की कोशिश करते रहे लेकिन नींद नहीं आई। अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के IPS अधिकारी हैं और 2024 में रिटायरमेंट के बाद भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनकी गिरफ्तारी ने यूपी पुलिस और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस ब्लॉग में हम उनकी जेल की पहली रात की पूरी कहानी, परिवार का दर्द, गिरफ्तारी का कारण और कानूनी स्थिति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

पहली रात का दर्दनाक अनुभव: चश्मा टूटा, नींद नहीं आई

अमिताभ ठाकुर को 8 दिसंबर की दोपहर लखनऊ-गोरखपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से उतारकर हिरासत में लिया गया। शाम तक उन्हें तिहाड़ जेल पहुंचाया गया। परिवार के अनुसार:

  • जेल में प्रवेश के दौरान उनके चश्मे पर चोट लगी और टूट गया।
  • रात में वे रातभर टहलते रहे, सोने की कोशिश करते रहे लेकिन नींद नहीं आई।
  • जेल में उन्हें अलग सेल में रखा गया, जहां कोई सुविधा नहीं थी।
  • सुबह तक वे पूरी तरह थक चुके थे।

परिवार ने बताया, “वह पूरी रात बेचैन रहे। चश्मा टूटने से उन्हें देखने में भी दिक्कत हुई।”

गिरफ्तारी का कारण: पुराना केस और नया विवाद

पुलिस के अनुसार, अमिताभ ठाकुर पर 2019 के एक केस में आरोप हैं। यह केस लखनऊ में एक महिला के साथ कथित गलत व्यवहार से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तारी हुई। परिवार का दावा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है। अमिताभ ठाकुर ने पहले कई बार सरकार की नीतियों की आलोचना की थी।

परिवार का दर्द: किडनैपिंग की अफवाह से हड़कंप

गिरफ्तारी के समय परिवार को पहले किडनैपिंग की सूचना मिली, जिससे हड़कंप मच गया। बाद में पता चला कि यह पुलिस की कार्रवाई थी। पत्नी ने कहा, “ट्रेन में अचानक पुलिस आई और उन्हें उठा ले गई। हम डर गए थे।” परिवार ने कोर्ट में याचिका दायर कर तुरंत रिहाई की मांग की।

कानूनी स्थिति: कोर्ट में सुनवाई, रिहाई की उम्मीद

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। अगली सुनवाई

15 दिसंबर को होगी। परिवार ने कहा, “यह गैरकानूनी गिरफ्तारी है।” पुलिस ने कहा, “कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई।”

राजनीतिक प्रभाव: विपक्ष ने उठाए सवाल

सपा और कांग्रेस ने कहा, “योगी सरकार पूर्व अधिकारियों को निशाना बना रही है।”

BJP ने चुप्पी साधी। यह मामला यूपी में पुलिस-राजनीति के संबंधों पर सवाल खड़ा करता है।