रतन टाटा सम्मान’: नारायण मूर्ति
मुंबई। University of Southern California (USC) ने मुंबई में एक ऐतिहासिक पहल की है। 11 दिसंबर 2025 को USC ने पहला ‘रतन टाटा सम्मान’ (Ratan Tata Award) लॉन्च किया और तीन भारतीय दिग्गजों – नारायण मूर्ति, सुनील मित्तल और अजीम प्रेमजी को यह सम्मान दिया। यह सम्मान रतन टाटा की स्मृति में स्थापित किया गया है, जिन्होंने 2024 में निधन के बाद भी भारत की कॉर्पोरेट और सामाजिक दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी। अमर उजाला और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स के अनुसार, USC के ट्रॉस्टर स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म ने इस सम्मान की शुरुआत की, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय नेतृत्व और सामाजिक योगदान को मान्यता देता है। यह ब्लॉग सम्मान की पूरी डिटेल्स, तीनों दिग्गजों की उपलब्धियां, USC के भारत से जुड़ाव और इसकी महत्ता बताता है।
‘रतन टाटा सम्मान’ का लॉन्च: रतन टाटा की स्मृति में पहला अवॉर्ड
USC ने मुंबई के एक भव्य समारोह में ‘रतन टाटा सम्मान’ की शुरुआत की। यह सम्मान उन भारतीयों को दिया जाता है जो व्यवसाय, समाज सेवा और नवाचार में असाधारण योगदान दे रहे हैं। पहली बार यह सम्मान तीन दिग्गजों को मिला:
- नारायण मूर्ति – इन्फोसिस के संस्थापक, भारतीय आईटी क्रांति के जनक।
- सुनील मित्तल – भारती एयरटेल के संस्थापक, टेलीकॉम और डिजिटल इंडिया के अग्रणी।
- अजीम प्रेमजी – विप्रो के चेयरमैन, भारत के सबसे बड़े परोपकारी।
USC के डीन ने कहा, “रतन टाटा जी की तरह ये तीनों दिग्गज भारत और दुनिया के लिए प्रेरणा हैं।”
तीनों दिग्गजों की उपलब्धियां: भारत की सॉफ्ट पावर
- नारायण मूर्ति: इन्फोसिस को वैश्विक आईटी कंपनी बनाया, हजारों युवाओं को रोजगार दिया।
- सुनील मित्तल: एयरटेल से भारत को मोबाइल क्रांति दी, अब 5G और डिजिटल सेवाओं में अग्रणी।
- अजीम प्रेमजी: विप्रो को IT और हार्डवेयर में मजबूत बनाया, प्रेमजी फाउंडेशन से शिक्षा और स्वास्थ्य में 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान।
तीनों ने रतन टाटा की तरह सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी है।
USC का भारत से जुड़ाव: रतन टाटा सम्मान की शुरुआत
भारत में अपना पहला सम्मान लॉन्च किया है। यह सम्मान हर साल दिया जाएगा।
USC के डीन ने कहा, “भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को मान्यता देना हमारा उद्देश्य है।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव: भारत की वैश्विक पहचान
यह सम्मान भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है। मोदी सरकार ने इसे “भारतीय नेतृत्व की वैश्विक मान्यता” बताया। यह कदम भारत की कॉर्पोरेट और सामाजिक विरासत को दुनिया के सामने लाता है।