PM मोदी बोले – दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा है
नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ा सम्मान मिला है। यूनेस्को ने दिवाली को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’ (Intangible Cultural Heritage of Humanity) की सूची में शामिल कर लिया है। 10 दिसंबर 2025 को यह घोषणा हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह विजय, प्रकाश और अच्छाई की जीत का प्रतीक है।” यह उपलब्धि भारत की 16वीं अमूर्त धरोहर बन गई है, जिसमें कुंभ मेला, योग, रामलीला और नृत्य-गीत जैसे तत्व पहले से शामिल हैं। अमर उजाला, दैनिक भास्कर और न्यूज18 की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घोषणा भारत की 5,000 साल पुरानी परंपरा को वैश्विक मान्यता देती है। इस ब्लॉग में हम दिवाली की यूनेस्को मान्यता की पूरी कहानी, मोदी का बयान, पहले से शामिल 15 धरोहरें और इसकी सांस्कृतिक-राजनीतिक महत्ता बताएंगे।
यूनेस्को की घोषणा: दिवाली अब वैश्विक धरोहर
यूनेस्को की 19वीं अंतर-सरकारी समिति ने फ्रांस के पेरिस में हुई बैठक में दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया। यह सूची उन परंपराओं को शामिल करती है जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं और मानवता की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं। दिवाली की प्रस्तुति भारत ने 2023 में की थी, जिसमें इस त्योहार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक महत्ता को विस्तार से बताया गया।
दिवाली अब भारत की 16वीं अमूर्त धरोहर बन गई है। इससे पहले शामिल धरोहरें:
- कुंभ मेला (2017)
- योग (2016)
- रामलीला (2008)
- रथ यात्रा (2022)
- नृत्य-गीत (2021)
- बौद्ध धर्म की परंपराएं (2019)
- पारंपरिक भारतीय चिकित्सा (2018)
- संस्कृत भाषा (2020)
- हस्तशिल्प (2015)
- लोक कला (2014)
- सांस्कृतिक उत्सव (2013)
- पारंपरिक खेल (2012)
- खान-पान (2011)
- संगीत (2010)
- लोक कथाएं (2009)
मोदी का बयान: दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा, “दिवाली को यूनेस्को की अमूर्त धरोहर में शामिल करना गर्व की बात है। यह प्रकाश का त्योहार है, जो अंधकार पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है।” मोदी ने कहा, “यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर ले गई है।”
सांस्कृतिक-राजनीतिक महत्ता: भारत की जीत
यह घोषणा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी जीत है। दिवाली अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हो गई है, जो भारत की 5,000 साल पुरानी परंपरा को सम्मान देती है। यह कदम भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को मजबूत करेगा।