5 हजार का टिकट 39 हजार का कैसे होने दिया
नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइंस के लगातार फ्लाइट कैंसलेशन और मनमाने हवाई किराए पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। 10 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने केंद्र और DGCA से सवाल किया – “हालात इतने खराब कैसे हो गए? 5 हजार रुपये का टिकट 39 हजार रुपये का कैसे होने दिया?” अमर उजाला और न्यूज18 की रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि इस संकट से यात्रियों को हो रही परेशानी पर क्या कदम उठाए गए। यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर हुई, जिसमें फेयर कैप, रिफंड और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई थी। इंडिगो संकट अब 8वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें 5000+ फ्लाइट्स कैंसल हो चुकी हैं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: केंद्र और DGCA पर सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस रवि चंद्र) ने सुनवाई के दौरान कहा, “यह समझ से परे है कि इतने बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स कैंसल हो रही हैं और किराए आसमान छू रहे हैं। केंद्र सरकार और DGCA को जवाब देना होगा कि इस संकट से यात्रियों को हो रही परेशानी पर क्या कदम उठाए गए?”
कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर 15 जनवरी 2026 तक जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि इंडिगो ने एकतरफा फ्लाइट्स कैंसल कीं, लेकिन किराए 5-8 गुना बढ़ा दिए। कोर्ट ने DGCA से भी पूछा कि फेयर कैप लागू करने के बाद भी किराए कैसे इतने बढ़े।
इंडिगो संकट का हाल: 8वें दिन 562 फ्लाइट्स कैंसल
इंडिगो का FDTL नियमों का संकट अब 8वें दिन में है। 10 दिसंबर को 562 फ्लाइट्स कैंसल हुईं। कुल 5000+ फ्लाइट्स कैंसल हो चुकी हैं। यात्रियों ने एयरपोर्ट्स पर हंगामा किया। इंडिगो ने कहा, “10-15 दिसंबर तक स्थिति सामान्य हो जाएगी।”
फेयर कैप का खेल: 5 हजार का टिकट 39 हजार का कैसे?
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि फेयर कैप लागू होने के बावजूद किराए कैसे बढ़े। उदाहरण:
- दिल्ली-मुंबई: 5,000 रुपये से 39,000 रुपये तक।
- दिल्ली-बैंगलोर: 6,000 से 35,000 रुपये।
- दिल्ली-हैदराबाद: 4,500 से 32,000 रुपये।
DGCA ने कहा, “हम फेयर कैप लागू कर चुके हैं, लेकिन कुछ रूट्स पर सीटें कम होने से किराए बढ़े।”
कोर्ट ने कहा, “यह तर्क स्वीकार्य नहीं।”
यात्रियों की परेशानी: हंगामा, रिफंड में देरी
यात्रियों ने कहा:
- वैकल्पिक फ्लाइट्स महंगी (45,000-60,000 रुपये)।
- होटल-कैब की व्यवस्था नाममात्र की।
- रिफंड में 15-20 दिन की देरी।
सुप्रीम कोर्ट ने PIL खारिज की, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई जारी रखी।