आपार आईडी अनिवार्य
गोरखपुर, 4 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कौड़ी राम क्षेत्र में शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) जयप्रकाश मौर्य ने सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों व प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं कि सभी छात्रों की ‘आपार आईडी’ (आधार आधारित स्थायी अकादमिक पंजीकरण) तत्काल बनवाना अनिवार्य है। यह आईडी अब शिक्षा प्रणाली की रीढ़ बनेगी, क्योंकि छात्रवृत्ति वितरण, नामांकन, उपस्थिति, स्थानांतरण, परीक्षाएं और परिणाम जैसी सभी शैक्षिक प्रक्रियाएं इसी से लिंक होंगी। बीईओ ने चेतावनी दी है कि देरी या गलती से भविष्य में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए स्कूलों को डेटा अपडेट करने का काम तुरंत पूरा करना होगा। यह पहल डिजिटल इंडिया के तहत शिक्षा को पारदर्शी और एकीकृत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
आपार आईडी क्या है? आधार से लिंक होकर बनेगी छात्रों की डिजिटल पहचान
आपार आईडी यानी आधार एनेबल्ड पर्मानेंट अकादमिक रजिस्ट्रेशन, एक 12-अंकीय यूनिक आईडी है जो छात्र के आधार कार्ड से सीधे जुड़ी होगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने इसे प्रत्येक शैक्षिक मॉड्यूल में अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों का डेटा एक जगह संग्रहीत करना है, ताकि डुप्लीकेट एंट्री या गलत जानकारी की समस्या न हो।
बीईओ जयप्रकाश मौर्य ने जारी पत्र में कहा, “यदि किसी छात्र की आपार आईडी किसी अन्य विद्यालय से जनरेट हो जाती है, तो नामांतरण, स्कॉलरशिप या परीक्षा में बाधा आ सकती है। सभी स्कूल प्रबंधक सुनिश्चित करें कि उनके विद्यालय के नामांकित छात्रों का डेटा तुरंत अपलोड हो।” कौड़ी राम ब्लॉक के 150 से अधिक स्कूलों में करीब 50,000 छात्र प्रभावित होंगे। स्कूलों को निर्देश है कि वे UDISE+ पोर्टल पर छात्रों का आधार नंबर, नाम, जन्मतिथि और अन्य डिटेल्स अपलोड करें, जिससे आईडी ऑटोमैटिक जनरेट हो जाए।
स्कूलों पर सख्ती क्यों? डिजिटल शिक्षा की नई सुबह, लेकिन चुनौतियां भी
यह निर्देश गोरखपुर जिले के कौड़ी राम क्षेत्र से शुरू होकर पूरे यूपी में फैलने वाला है। शिक्षा विभाग का मानना है कि आपार आईडी से छात्रों का ट्रैकिंग आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए, ग्रामीण इलाकों में जहां छात्र अक्सर स्कूल बदलते हैं, वहां स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसे लाभ सीधे आधार से वेरिफाई हो सकेंगे, जिससे फर्जीवाड़ा रुकेगा।
हालांकि, ग्रामीण स्कूलों में चुनौतियां भी हैं। कई जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, और शिक्षकों को ट्रेनिंग की कमी महसूस हो रही है। कौड़ी राम के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे पास 300 छात्र हैं, लेकिन आधार कार्ड न होने वालों की संख्या 20% है। क्या इनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था होगी?” विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधार न होने पर नामांकन रोक नहीं सकते, लेकिन आईडी जनरेशन प्राथमिकता है।
यूपी में डिजिटल शिक्षा क्रांति: आपार आईडी से क्या-क्या फायदे?
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘डिजिटल एजुकेशन पॉलिसी’ के तहत आपार आईडी एक बड़ा कदम है।
पिछले साल लॉन्च हुई यह स्कीम अब 1 करोड़ से अधिक छात्रों को कवर कर रही है।
फायदे इस प्रकार हैं:
- पारदर्शिता: छात्रवृत्ति में देरी खत्म, सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर।
- ट्रैकिंग: उपस्थिति और प्रदर्शन का रीयल-टाइम डेटा, जो शिक्षकों को मदद देगा।
- समावेशिता: वित्तविहीन स्कूलों में भी लागू, ताकि गरीब छात्र पीछे न रहें।
- भविष्य की तैयारी: NEP 2020 के अनुरूप, जहां डिजिटल आईडी से कौशल विकास को लिंक किया जाएगा।
गोरखपुर डिवीजन के डीईओ ने बताया, “कौड़ी राम के बाद अन्य ब्लॉकों में भी यह अभियान चलेगा।
31 दिसंबर तक 100% कवरेज का लक्ष्य है।
” अभिभावकों को सलाह दी गई है
कि वे अपने बच्चों का आधार कार्ड अपडेट कराएं।
