दिल्ली ब्लास्ट के बाद बड़ा खुलासा
लखनऊ/नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025: दिल्ली में पिछले हफ्ते हुए सीरियल लो-इंटेंसिटी ब्लास्ट के बाद खुफिया एजेंसियों की जांच ने एक भयानक सच उजागर किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने नेपाल में डॉक्टर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स और कुछ NGO के जरिए एक गुप्त जासूसी नेटवर्क तैयार किया था, जो चैरिटी और मेडिकल कैंप के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों को सपोर्ट कर रहा था। यह खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, IB और रॉ की संयुक्त जांच में हुआ है। अभी तक नेपाल से 7 डॉक्टर्स और 3 मेडिकल स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया गया है, जबकि भारत में 4 संदिग्धों पर शिकंजा कसा जा चुका है।
चैरिटी के नाम पर कैसे चल रहा था खेल?
जांच एजेंसियों के अनुसार ISI ने 2022 से नेपाल के वीरगंज, जनकपुर, बीरगंज और काठमांडू में कई फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट और मेडिकल कैंप शुरू किए थे। इनका नाम था “हेल्थ फॉर ऑल फाउंडेशन” और “बॉर्डर ह्यूमनिटेरियन मिशन”। ये संस्थाएं भारत-नेपाल बॉर्डर के गांवों में फ्री मेडिकल कैंप लगाती थीं और गरीब मरीजों को मुफ्त दवाइयां बांटती थीं। लेकिन असल मकसद कुछ और था:
- बॉर्डर से सटे इलाकों में भारतीय नागरिकों की जानकारी इकट्ठा करना
- उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के युवाओं को रेडिकलाइज करना
- हवाला के जरिए आतंकी फंडिंग करना
- संवेदनशील सरकारी ठिकानों की फोटो और लोकेशन खुफिया तरीके से भेजना
इन कैंपों में काम करने वाले ज्यादातर डॉक्टर्स नेपाल के मेडिकल कॉलेजों के पूर्व छात्र थे, जिन्हें ISI हैंडलर ने 5 से 15 लाख नेपाली रुपये मासिक भुगतान का लालच दिया था।
दिल्ली ब्लास्ट से कैसे जुड़ा कनेक्शन?
दिल्ली के कश्मीरी गेट, सदर बाजार और करोल बाग में हुए ब्लास्ट में इस्तेमाल IED की टेक्नोलॉजी और केमिकल नेपाल से सप्लाई किए गए थे। गिरफ्तार आतंकियों के मोबाइल से मिले चैट में एक कोडवर्ड “डॉक्टर साहब” बार-बार इस्तेमाल हुआ। जब इसकी तहकीकात हुई तो पता चला कि “डॉक्टर साहब” कोई और नहीं, वीरगंज के एक नामी न्यूरो सर्जन थे, जो ISI के लिए काम कर रहे थे। उनके बैंक अकाउंट में दुबई और पाकिस्तान से लाखों रुपये आए थे, जो चैरिटी के नाम पर दिखाए गए थे।
अभी तक क्या-क्या हुआ एक्शन?
- नेपाल पुलिस और भारतीय दूतावास के सहयोग से 7 डॉक्टर्स हिरासत में
- लखनऊ, गोरखपुर और पटना से 4 संदिग्ध गिरफ्तार
- 3 फर्जी NGO के बैंक अकाउंट फ्रीज
- नेपाल से भारत आने वाली 12 मेडिकल टीमों पर प्रतिबंध
- बॉर्डर पर खुफिया निगरानी 10 गुना बढ़ाई गई
यूपी-बिहार पर क्यों थी नजर?
खुफिया सूत्रों का कहना है कि नेपाल बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, महाराजगंज, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर) और बिहार के जिलों में युवाओं को आसानी से रेडिकलाइज किया जा सकता है। इन इलाकों में गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर ISI मॉड्यूल तैयार कर रहा था। मेडिकल कैंप के दौरान युवाओं से दोस्ती की जाती थी, फिर सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी कंटेंट भेजा जाता था।
सरकार और एजेंसियों का सख्त रुख
गृह मंत्रालय ने नेपाल बॉर्डर पर सभी मेडिकल कैंप और NGO एक्टिविटी पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “देश की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चाहे डॉक्टर हो या कोई और, राष्ट्रविरोधी गतिविधि करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
” नेपाल सरकार ने भी सहयोग का भरोसा दिया है।