परियोजना का रूट और स्टेशन: ग्रामीणों की पहुंच आसान होगी
यह नई रेल लाइन गोरखपुर जिले के सहजनवा से शुरू होकर दोहरीघाट तक विस्तारित होगी। कुल 81.17 किमी लंबाई में 11 नए स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो दक्षिण पूर्वांचल के दूरस्थ गांवों को रेल सुविधा से जोड़ेंगे। स्टेशनों की सूची इस प्रकार है:
- पिपरौली-सहजना
- उनवाल-बधनी
- खजनी-चटाई
- बैदौली बाबू-बैदौली बाबू
- बांसगांव-मझगांवा
- बनवरपुर-बैठखुर्द
- गोला बाजार-रीमा
- उरुवा बाजार-गौरखास
- भारोली-मर्चियार बूजुर्ग
- न्यू दोहरीघाट-बुधावल
- बर्धलगंज-तीहा मोहम्मदपुर
इन स्टेशनों से ग्रामीणों को रेल यात्रा के लिए 50 किमी दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले चरण में सहजनवा से बांसगांव तक का काम तेजी से चल रहा है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है – कुल 403.29 हेक्टेयर में से 57.19 हेक्टेयर पहले ही हासिल हो चुके हैं, जो 112 गांवों को प्रभावित करेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर हाइलाइट्स: सरयू ब्रिज बनेगा सबसे बड़ा निर्माण
परियोजना का सबसे रोमांचक हिस्सा सरयू नदी पर बनने वाला 1200 मीटर लंबा रेल पुल है, जो पूर्वांचल की इंजीनियरिंग क्षमता को प्रदर्शित करेगा। इसके अलावा, निर्माण में शामिल होंगे:
- 2 ओवरब्रिज
- 15 अंडरपास
- 11 बड़े पुल
- 47 छोटे पुल
ये सभी संरचनाएं आधुनिक तकनीक से बनेंगी, जो न केवल रेल यात्रा को सुरक्षित बनाएंगी बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी मजबूत रहेंगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह प्रोजेक्ट सिंगल लाइन पर आधारित होगा, लेकिन भविष्य में डबल लाइन में अपग्रेडेशन की संभावना है। कुल बजट 1320 करोड़ रुपये है, जो केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
फायदे: यूपी-बिहार कनेक्टिविटी में क्रांति
यह रेल लाइन पूर्वांचल के लिए वरदान साबित होगी। वर्तमान में ग्रामीणों को गोरखपुर या वाराणसी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं, लेकिन नए स्टेशनों से यात्रा समय 50% तक कम हो जाएगा। सुपरफास्ट ट्रेनें चलने से छपरा (बिहार) तक का सफर महज 2-3 घंटों में संभव हो जाएगा, जो व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा। प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक केंद्रों तक आसान पहुंच से लाखों तीर्थयात्रियों को लाभ मिलेगा।
आर्थिक रूप से, यह प्रोजेक्ट हजारों नौकरियां पैदा करेगा – निर्माण चरण में मजदूरों से लेकर इंजीनियरों तक। लंबे समय में, दक्षिण पूर्वांचल के किसान अपने उत्पादों को तेजी से बाजार तक पहुंचा सकेंगे, जिससे आय में वृद्धि होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से, रेल यात्रा को बढ़ावा देकर सड़क यातायात कम होगा, जिससे प्रदूषण घटेगा। ग्रामीणों का कहना है, “यह लाइन हमारे गांवों को शहरों से जोड़ेगी, विकास का नया दौर शुरू होगा।”
समयसीमा और चुनौतियां: तीन चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट
परियोजना को तीन फेज में विभाजित किया गया है। पहला फेज (सहजनवा-बांसगांव) 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि सम्पूर्ण प्रोजेक्ट 2028 तक चालू हो जाएगा। चुनौतियां जैसे भूमि विवाद और बाढ़ प्रभावित इलाके हैं
, लेकिन रेलवे ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है।
उत्तर पूर्व रेलवे के जीएम ने कहा,