दिल्ली की सांसें कराह रही हैं: प्रदूषण का कहर जारी
दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जहर बन गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) शुक्रवार को 377 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह लगातार 15वें दिन है जब शहर की हवा इस घातक स्तर पर बनी हुई है। पिछले दिनों के आंकड़े देखें तो सोमवार को AQI 382, मंगलवार को 352, बुधवार को 327 और गुरुवार को 335 रहा। यह बढ़ता ट्रेंड चिंता का विषय है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब वायु प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है।
CPCB की ‘समीर’ ऐप पर उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि दिल्ली के विभिन्न निगरानी केंद्रों पर PM2.5 और PM10 के स्तर खतरनाक सीमा से ऊपर हैं। AQI की श्रेणियां स्पष्ट हैं: 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर। वर्तमान स्तर पर सांस लेना मुश्किल हो गया है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों के रोगियों के लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इस प्रदूषण के संपर्क में रहने से सांस की बीमारियां, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण के मुख्य स्रोत: वाहन और पराली का दंश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पुणे केंद्र के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन (एमिशंस) का योगदान सबसे ज्यादा है। गुरुवार को यह 19.5 प्रतिशत रहा, जबकि पड़ोसी गाजियाबाद से 8.2 प्रतिशत और बागपत से 7.3 प्रतिशत प्रदूषण आया। पराली जलाने का स्तर कम है, मात्र 0.7 प्रतिशत, लेकिन शुक्रवार के लिए अनुमानित 1.5 प्रतिशत भी चिंताजनक है। सर्दियों में ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक कण हवा में लटक जाते हैं, जो स्थिति को और बदतर बनाते हैं।
IMD ने शुक्रवार के लिए अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस का पूर्वानुमान जारी किया है। हवा की गति कम होने से कोई राहत नहीं मिलने की संभावना है। आने वाले सप्ताह में भी AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रह सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-NCR में 1 करोड़ से अधिक वाहन सड़कों पर हैं, जो रोजाना हजारों टन कार्बन उत्सर्जित करते हैं। इसके अलावा, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और औद्योगिक इकाइयां भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही हैं।
सरकारी प्रयास: एंटी-स्मॉग गन और अन्य उपाय
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठा रही हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अपने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए 82 ‘एंटी-स्मॉग गन’ तैनात की हैं। ये मशीनें पानी की महीन धुंध छिड़ककर हवा में लटकी धूल को जमीन पर उतारती हैं। DMRC ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “दिल्ली-एनसीआर में ‘एंटी-स्मॉग गन’ के इस्तेमाल में अग्रणी, DMRC ने अनिवार्य नियम लागू होने से पहले ही इन्हें तैनात कर दिया था।” अब सभी सिविल ठेकेदारों के साथ अनुबंधों में इनका उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
हालांकि, प्रयासों के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में मुंबई नगर निगम (MCD) ने महरौली-बदरपुर रोड पर DMRC के कार्यस्थल पर प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने पर 3.8 लाख रुपये का चालान जारी किया। इसके अलावा, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस, निर्माण कार्यों पर रोक और वाहनों की पाबंदी जैसे कदम उठाए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के समाधान के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा,
हरित ऊर्जा और पराली प्रबंधन नीतियों की जरूरत है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव: सतर्क रहें नागरिक
प्रदूषण का असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, AQI 300 से ऊपर रहने पर सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन और थकान
जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
अस्पतालों में सांस संबंधी रोगियों की संख्या में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के मुताबिक, PM2.5 का वार्षिक औसत
5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए,
लेकिन दिल्ली में यह 100 से ऊपर है।
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि मास्क पहनें, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग
करें और बाहर कम निकलें।
खासकर सुबह और शाम के समय प्रदूषण अधिक होता है।
योग और व्यायाम से इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है।
सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1708 जारी किया है,
जहां प्रदूषण संबंधी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं