प्रयागराज, 26 नवंबर 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 2026 का महाकुंभ मेला इतिहास रचने को तैयार है। माघ मेले के 71 वर्षों (1954 से) के इतिहास में पहली बार पुलों को भगवा रंग दिया जा रहा है, जो इस आयोजन को कई मायनों में ऐतिहासिक बना देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया समीक्षा के बाद तैयारियां चरम पर पहुंच गई हैं। 13 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलने वाले इस मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यह न केवल आस्था का महासागर होगा, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी प्रदर्शन होगा।
महाकुंभ 2025 का ऐतिहासिक महत्व
कुंभ मेला प्राचीन परंपरा का प्रतीक है, जो हर 12 वर्ष में प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होता है। 1954 से माघ मेले का सिलसिला चला आ रहा है, जो अर्धकुंभ और महाकुंभ की नींव रखता है। 2026 का महाकुंभ 71 वर्षों में सबसे भव्य होगा। पिछले कुंभों में 7-10 करोड़ श्रद्धालु आए थे, लेकिन इस बार 12-15 करोड़ की संख्या इसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना देगी। यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त यह मेला वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रयागराज को स्थापित करेगा। सीएम योगी ने कहा है कि यह ‘सनातन संस्कृति का वैश्विक उत्सव’ होगा, जो पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
71 वर्षों में पहला बड़ा बदलाव: पुलों का भगवा रंग
माघ मेले के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव पुलों का रंग है। पारंपरिक रूप से काले रंग के पोतून ब्रिज (पीपी ब्रिज) अब भगवा (केसरिया) रंग में रंगे जाएंगे। यह पहली बार होगा जब ये पुल भगवा छटा में नजर आएंगे, जो भव्यता और एकरूपता बढ़ाएंगे। सामान्यतः छह पुल बनते थे, लेकिन इस बार सात पुल तैयार किए जा रहे हैं ताकि बढ़ी हुई भीड़ को संभाला जा सके। यह बदलाव न केवल दृश्य सौंदर्य को निखारेगा, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा। इंजीनियरों का कहना है कि भगवा रंग पुलों को मजबूती के साथ-साथ आध्यात्मिक महत्व देगा, जो कुंभ की पवित्रता से मेल खाता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांतिकारी कदम
महाकुंभ को ऐतिहासिक बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व काम हो रहा है।
आयोजन क्षेत्र को 800 हेक्टेयर तक विस्तारित किया गया है, जो पिछले संस्करणों से कहीं बड़ा है।
टेंट सिटी के लिए भूमि समतलीकरण तेजी से पूरा हो रहा है।
बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए 5000 मेगावाट की क्षमता सुनिश्चित की गई है। पेयजल के लिए 1000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा रही है,
जो प्रतिदिन 20 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध कराएगी। सीवरेज सिस्टम में 500 शौचालय
ब्लॉक और 2000 किलोमीटर ड्रेनेज लाइनें शामिल हैं।
इसके अलावा, 50 हजार शौचालय, 1000 शॉवर यूनिट और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं में 100 अस्पताल, 500 एम्बुलेंस और 10 हजार डॉक्टर तैनात होंगे।
पर्यावरण और सुरक्षा के नए आयाम
इस कुंभ में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। गंगा की सफाई के लिए विशेष अभियान चलेंगे,
और प्लास्टिक-मुक्त मेला होगा। ड्रोन और सीसीटीवी से सुरक्षा सुनिश्चित होगी,
जिसमें 50 हजार पुलिसकर्मी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होगा।
परिवहन के लिए 5000 बसें, हेलीपैड और रेलवे स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। ये बदलाव कुंभ को आधुनिक और सतत बनाएंगे।