CJI बीआर गवई ने अपने विदाई समारोह में कहा कि उनका 41 साल का न्यायिक सफर एक “कानून के छात्र” से “न्याय के छात्र” का रहा है। उन्होंने बताया कि उनका आरंभ एक साधारण छात्र के रूप में हुआ, जो मैजिस्ट्रेट और जज बनकर आखिरकार भारत के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचा।
उन्होंने अपने जीवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान को सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत माना।बीआर गवई ने कहा कि वे बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण पूरी तरह से सेक्युलर है, जो सभी धर्मों का सम्मान करता है।
उनका मानना था कि न्यायपालिका एक अकेले सीजेआई का प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि संयुक्त न्यायपालिका का प्रतीक होनी चाहिए, जहां निर्णय सभी न्यायाधीशों, वकीलों, रजिस्ट्र्री और कर्मचारियों की भागीदारी से होते हैं।उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता को भारतीय संविधान के चार मुख्य स्तंभों के रूप में देखा और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इन मूल्यों के अनुसार न्याय देने की पूरी कोशिश की।

उन्होंने बताया कि उनके फैसले हमेशा अंतिम उपयोगकर्ता यानी आम आदमी के लिए समझने योग्य और न्यायपूर्ण रहे।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कार्यक्षेत्र में सुधार जैसे लिस्टिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने का उल्लेख किया और सहयोगियों, परिवार और स्टाफ को इस सफर में मददगार मानते हुए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीश का पद किसी शक्ति के लिए नहीं बल्कि देश की सेवा का माध्यम होना चाहिए।अपने कार्यकाल के दौरान आए कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने न्यायपालिका की आजादी और मजबूती पर जोर दिया, और कहा कि देश की सेवा के लिए उन्होंने जो कुछ भी किया, उससे संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि उनका सफर “पूर्ण संतोष” और “समाधान” के साथ खत्म हो रहा है।
उन्होंने वकीलों से संवाद बनाए रखने और उनके मुद्दों को समझने का आग्रह किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) को हमेशा न्यायपालिका के साथ जुड़े रहना चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सके।
विदाई भाषण में खासतौर पर यह भावनात्मक क्षण थे जब उन्होंने अपने गांव जाकर बिना सुरक्षा के रहने की बात कही और अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें उनके गांव में नुकसान पहुंचाता है, तो उसे वह अपनी मृत्यु समझेंगे क्योंकि उन्होंने अपने कर्तव्यों की पूरी निष्ठा से सेवा की है।
इस विदाई कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था के विभिन्न अनुभवी वकीलों और न्यायाधीशों ने उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए उनके कार्यकाल को न्यायपालिका में एक मील का पत्थर बताया।