भारत का रक्षा तंत्र हमेशा से उसकी ताकत और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है, जिसके पास अत्याधुनिक और अत्यंत घातक लड़ाकू विमानों का बेड़ा है।
ये विमान भारत की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उसके सामरिक प्रभाव को भी मजबूत करते हैं।ऐतिहासिक पृष्ठभूमिब्रिटिश शासन के समय 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी।
उस समय भारतीय पायलट ब्रिटिश बनाए विमानों को उड़ाते थे। स्वतंत्रता के बाद भारत ने धीरे-धीरे विदेशी विमानों के सहारे से अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाया। शुरुआती काल में हंटर, माइग-21 और नैटो काल के विमानों ने भारतीय फौज की रीढ़ की हड्डी का काम किया।1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में भारतीय लड़ाकू विमानों ने दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक प्रहार किया।
मिग-21 और ग्नैट जैसे विमानों ने अपनी क्षमता से दुनिया को चौंका दिया था।प्रमुख लड़ाकू विमानआज के समय में भारतीय वायुसेना के पास कई शक्तिशाली विमान मौजूद हैं, जो विभिन्न देशों की तकनीक पर आधारित हैं और कई स्वदेशी हैं।
सुखोई Su-30MKI – रूस और भारत के संयुक्त सहयोग से बना यह बहुउद्देश्यीय (Multirole) फाइटर जेट भारतीय वायुसेना की रीढ़ है। इसकी मारक क्षमता 3,000 किलोमीटर तक है और इसमें एयर-टू-एयर तथा एयर-टू-ग्राउंड दोनों प्रकार की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।
यह ब्रह्मोस मिसाइल से भी लैस है, जिससे यह भारतीय शस्त्रागार का सबसे सक्षम लड़ाकू विमान बन जाता है।राफेल (Dassault Rafale) – फ्रांस निर्मित यह अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान भारत में 2020 से शामिल हुआ।
यह पर्वतीय इलाकों में भी आसानी से उड़ान भर सकता है और एक साथ कई टारगेट पर हमला करने की क्षमता रखता है। इसमें Meteor और SCALP जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, जो इसे बेहद घातक बनाती हैं।तेजस (HAL Tejas) – यह भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है।
यह भारत की आत्मनिर्भरता (Make in India) की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। तेजस आधुनिक एवियोनिक्स, फ्लाई-बाय-वायर तकनीक और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है।मिग-29 – रूस निर्मित यह विमान वायुसेना में लंबे समय से सेवा दे रहा है। इसे ‘फुलक्रम’ कहा जाता है।
यह वायु-संरक्षण और इंटरसेप्शन मिशन में विशेषज्ञ है और भारतीय नौसेना के मिग-29K संस्करण का उपयोग विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य पर भी किया जाता है।मिराज-2000 – फ्रांसीसी निर्माता डसॉल्ट का यह जेट 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के सबसे प्रभावशाली हथियारों में से एक साबित हुआ था।
इसकी सटीक लक्ष्य साधने की क्षमता ने कारगिल जैसे कठिन इलाके में जीत सुनिश्चित की।जगुआर (SEPECAT Jaguar) – यह ग्राउंड अटैक और गहरे अंदर तक बम बरसाने में माहिर विमान है। यह ब्रिटिश डिजाइन वाला फाइटर-बॉम्बर भारत में कई दशकों से सेवा दे रहा है।स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भरताभारत अब पूरी तरह स्वदेशी विमान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तेजस के बाद अब ‘तेजस मार्क-2’, ‘एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft)’ और ‘TEDBF (Twin Engine Deck Based Fighter)’ जैसे प्रोजेक्ट पर काम तेज़ी से चल रहा है।AMCA पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा, जो रडार से छिपकर शत्रु पर हमला करने में सक्षम होगा।
इसका पूरा डिजाइन और निर्माण भारत में ही किया जाएगा।तकनीकी विशेषताएंआधुनिक भारतीय लड़ाकू विमान कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं—फ्लाई-बाय-वायर नियंत्रण प्रणाली जो पारंपरिक मैकेनिकल सिस्टम से हल्की और ज्यादा सटीक है।मल्टी-रोल क्षमता, जिससे एक ही विमान निगरानी, हमले और रिफ्यूलिंग मिशन में काम कर सकता है।
अत्याधुनिक रडार जो शत्रु के विमानों को सैकड़ों किलोमीटर दूर पहचान सकता है।स्वचालित लक्ष्य साधने और सटीक नेविगेशन सिस्टम।नौसेना और भविष्य की योजनाएंभारतीय नौसेना के लिए विशेष फाइटर जेट भी विकसित किए जा रहे हैं। INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों पर मिग-29K और भविष्य में TEDBF जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों को तैनात किया जाएगा।
इससे भारत की समुद्री सीमाएं भी सुरक्षित रहेंगी।निष्कर्षभारत के लड़ाकू विमान केवल उसकी सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय इंजीनियरिंग, तकनीक और आत्मनिर्भरता के प्रतीक भी हैं। तेजस से लेकर राफेल और सुखोई तक, हर विमान ने भारत को एक नई ऊंचाई दी है। आने वाले वर्षों में जब स्वदेशी AMCA और TEDBF जैसे विमान शामिल होंगे, तो भारत की वायुसेना दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं में से एक बन जाएगी।