गोरखपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों में रात के अंधेरे में चल रहा मिलावटी पनीर और खोवा तैयार करने का गिरोह अब स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है।
सूचना के अनुसार खजनी, भैंस, महादेवा बाजार, पिपरा गंगा, दुधारा और सैटिवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिठाईयों में इस्तेमाल होने वाला खोवा और पनीर नकली दूध से तैयार किया जा रहा है।
यह कारोबार रात होते ही सक्रिय हो जाता है और तड़के सुबह ही तैयार माल विभिन्न बाजारों में पहुंचा दिया जाता है।रात में सक्रिय होते हैं मिलावटखोरस्थानीय लोगों ने बताया कि इन इलाकों के कुछ डेयरी संचालक और व्यापारियों ने मिलावट का नेटवर्क बना रखा है।
वे भैंसपालकों से सस्ते दाम पर दूध खरीदते हैं और उसमें सिंथेटिक पदार्थ, डिटर्जेंट, रिफाइंड ऑयल और रासायनिक पदार्थ मिलाकर कृत्रिम दूध तैयार करते हैं। इस नकली दूध से फिर खोवा और पनीर बनाया जाता है। यह सारा काम रात में किया जाता है ताकि किसी को भनक न लगे।
सुबह होने से पहले यह मिलावटी सामग्री ट्रक और डिलीवरी वैन से शहर और आसपास के बाजारों में भेज दी जाती है।बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहा है नकली पनीरगोरखपुर शहर और आसपास के कस्बों के दुकानदार इन सस्ते उत्पादों को आसानी से खरीद लेते हैं क्योंकि इनकी कीमत असली दूध के पनीर और खोवा से कई गुना कम होती है।
त्योहारों और शादी के सीज़न में इस अवैध कारोबार की मांग अचानक बढ़ जाती है। महादेवा बाजार, खजनी और पिपरा गंगा इलाके के कई दुकानदारों पर शक जताया जा रहा है कि वे भी इसी नेटवर्क से जुड़कर हर दिन बड़ी मात्रा में नकली डेयरी उत्पाद खरीद रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कमजोरस्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई बेहद ढीली है।
जांच दस्ते औपचारिकता पूरी करने के लिए केवल त्योहारों के दौरान ही अभियान चलाते हैं, जबकि ये मिलावटखोर हर रात सक्रिय रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में कुछ नमूनों की जांच में हानिकारक रसायनों की पुष्टि भी हुई है, लेकिन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। मिलीभगत और रिश्वतखोरी के आरोप भी बार-बार सामने आए हैं।
ग्रामीणों में बढ़ती चिंता और विरोधगांव के कई लोगों ने बताया कि दूध कटने की शिकायतें, बच्चों के पेट दर्द, उल्टी-दस्त जैसे लक्षण तेजी से बढ़े हैं। लोगों का कहना है कि इन लक्षणों का मुख्य कारण यही नकली दूध और उससे बने उत्पाद हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल ठोस कदम उठाकर इस गिरोह को पकड़ने के लिए रात में छापेमारी करे। कई सामाजिक संगठन और स्थानीय पत्रकार भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं।
मिलावट की पहचान कैसे करेंविशेषज्ञों का कहना है कि असली और नकली खोवा-पनीर की पहचान कर पाना मुश्किल जरूर है, लेकिन कुछ तरीकों से उपभोक्ता सावधानी बरत सकते हैं। असली पनीर को दबाने पर उसमें से हल्का दूध जैसा तरल निकलता है और वो रबड़ जैसा नहीं होता।
वहीं मिलावटी पनीर ज्यादा रबड़ीला होता है और पानी में डालने पर ऊपर तैरता है। खोवा का रंग भी अधिक सफेद या चमकीला दिखे तो समझ लेना चाहिए कि उसमें कृत्रिम दूध या रसायन मिलाया गया है।सरकार से सख्त कार्रवाई की मांगगोरखपुर के खजनी क्षेत्र के किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मिलावटखोरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि दूध उत्पादों में मिलावट न केवल खाद्य सुरक्षा का उल्लंघन है, बल्कि यह आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर कार्रवाई नहीं होती तो वे स्वयं धरना प्रदर्शन करेंगे और मामले को उच्च स्तर तक उठाएंगे।निष्कर्षगोरखपुर के खजनी, महादेवा बाजार, पिपरा गंगा और सैटिवा इलाके अब मिलावटी डेयरी उत्पादों के नए केंद्र बन गए हैं। जहाँ एक ओर ये व्यापारी मोटा मुनाफा कमाने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता का स्वास्थ्य दांव पर लगा हुआ है।
जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, खाद्य निरीक्षण विभाग और पुलिस मिलकर त्वरित कार्रवाई करें, ताकि इस जहर जैसे कारोबार पर लगाम लगाई जा सके और गोरखपुर की साख और जनता की सुरक्षा दोनों बची रह सकें।