गोरखपुर। सोमवार को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 9 पर अप्रत्याशित हालात देखने को मिले। मुंबई सीएसएमटी विशेष ट्रेन करीब छह घंटे की देरी से चलने वाली थी, लेकिन इसके बावजूद दोपहर 2 बजे से ही सैकड़ों यात्री स्टेशन पर पहुंच गए थे। सभी की मंजिल एक थी—गोरखधाम एक्सप्रेस से सफर करना।
लंबी कतारें, बैग और सूटकेस के बीच इंतजार करते चेहरे, और हर कुछ मिनट पर ट्रेन आने की खबर सुनने की उम्मीद में उठती निगाहें—यही नजारा था प्लैटफॉर्म पर।रेलवे के अनुसार, मुंबई सीएसएमटी स्पेशल ट्रेन का निर्धारित समय सुबह 8:00 बजे का था, लेकिन तकनीकी कारणों और उत्तर दिशा में धुंध की वजह से ट्रेन को छह घंटे की देरी से रवाना किया गया।
जैसे-जैसे दोपहर 2 बजे का समय नजदीक आया, स्टेशन पर भीड़ बढ़ती चली गई। यात्रियों में अधिकांश वे थे जो हफ्तों पहले टिकट बुक कर चुके थे और अब इस देरी से परेशान थे। कुछ यात्रियों ने नाराजगी जताई तो कुछ ने स्टेशन के चाय और स्नैक स्टॉलों पर समय काटने की कोशिश की।प्लेटफार्म नंबर 9 पर खड़े सैकड़ों यात्रियों में अधीरता साफ झलक रही थी।
लाउडस्पीकर पर बार-बार अनाउंसमेंट होती रही कि गोरखधाम एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से विलंबित है और अगले आदेश तक प्लेटफार्म बदलाव की कोई संभावना नहीं है। भीड़ में बुजुर्ग, महिलाएं, छोटे बच्चे और कुछ छात्र भी शामिल थे जो मुंबई, पुणे और मध्य प्रदेश की ओर जा रहे थे।
यात्री विनोद तिवारी, जो गोरखपुर के कैंट इलाके के रहने वाले हैं, ने बताया, “हम सुबह से स्टेशन पर हैं। पहले कहा गया कि ट्रेन थोड़ी देर से आएगी, फिर कहा गया दोपहर तक। अब शाम होती जा रही है और हम यहीं बैठे हैं।” वहीं, एक अन्य यात्री नीलम यादव ने कहा कि बच्चों के साथ लंबे इंतजार ने यात्रा को पहले ही थकानभरा बना दिया है।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त पानी की व्यवस्था, सीढ़ियों के पास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, और प्लेटफार्म की सफाई तेज कर दी थी। हालांकि, भीड़ बढ़ने के कारण व्यवस्था पर दबाव पड़ता दिखा। कई यात्री सीढ़ियों, बेंचों और यहां तक कि प्लेटफार्म के किनारे पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते रहे।गोरखपुर जंक्शन पर एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि ट्रेन की देरी का कारण तकनीकी दिक्कतों के साथ-साथ रूट पर अधिक भीड़भाड़ है।
“हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि ट्रेन को जितनी जल्दी हो सके रवाना किया जाए। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी प्राथमिकता है,” अधिकारी ने कहा।सांझ ढलने के साथ-साथ स्टेशन की लाइटें जल उठीं लेकिन प्लेटफार्म नंबर 9 की भीड़ कम नहीं हुई। बच्चे ऊब कर इधर-उधर दौड़ते रहे जबकि बुजुर्ग अपने बैग पर सिर रखकर आराम करने की कोशिश करते रहे।
कुछ लोग मोबाइल पर बार-बार ‘ट्रेन एनक्वायरी’ ऐप चेक कर रहे थे ताकि ट्रेन की रियल-टाइम स्थिति पता चले।लगभग आठ घंटे तक इंतजार के बाद जब गोरखधाम एक्सप्रेस के आने की घोषणा हुई तो प्लेटफार्म पर एक अजीब सी राहत और बेचैनी का माहौल बन गया। हर कोई अपनी कोच की दिशा में तेजी से बढ़ा ताकि सीट मिल सके। कुछ यात्रियों ने राहत की सांस ली तो कुछ ने नाराजगी जाहिर की कि ट्रेन इतनी देर से क्यों आई।ट्रेन में सवार लोगों की संख्या ने रेलवे कर्मचारियों को भी परेशान कर दिया।
ट्रेन के दरवाजों के पास धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई थी। गार्ड और सुरक्षा कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद यात्री धीरे-धीरे अपनी सीटों तक पहुंचे। ट्रेन जैसे ही स्टेशन से रवाना हुई, प्लेटफार्म पर खड़े परिजनों ने हाथ हिलाकर विदाई दी और लंबे इंतजार के बाद राहत की सांस ली।यह पहला मौका नहीं है जब गोरखधाम एक्सप्रेस या मुंबई सीएसएमटी विशेष ट्रेन ने यात्रियों को इतने लंबे इंतजार में डाला हो।
इससे पहले भी देरी के मामले सामने आ चुके हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि ट्रैफिक जाम और समय सारिणी में बदलाव के कारण ऐसी स्थितियाँ कभी-कभी बन जाती हैं।हालांकि, यात्रियों का कहना है कि यदि ट्रेन देरी से चलने वाली हो तो इसकी समय पर सूचना दी जानी चाहिए ताकि लोग अनावश्यक रूप से स्टेशन पर समय न गंवाएं।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या रेलवे के सूचना तंत्र को और आधुनिक बनाने की जरूरत है।
आज जब मोबाइल और इंटरनेट हर हाथ में है, तो इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को घंटे भर प्लेटफार्म पर बिठाए रखना कहीं न कहीं संचार प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है।फिलहाल, सोमवार का दिन इन यात्रियों के लिए एक थका देने वाला अनुभव बन गया।
पर उनकी राहत यही थी कि आखिरकार देर से ही सही, गोरखधाम एक्सप्रेस रवाना तो हुई। उम्मीद की जा रही है कि रेलवे भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए अपनी व्यवस्थाओं को और चुस्त बनाएगा।