महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जिसमें जनजातीय समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा को सुलभ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय परिवहन बसों को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाने का सौभाग्य मिला। यह कार्यक्रम जनजातीय गौरव दिवस के सुअवसर पर आयोजित किया गया था और इसने स्थानीय जनजातीय इलाकों में शिक्षा और कनेक्टिविटी के सुधार का एक बड़ा कदम साबित हुआ।कार्यक्रम का महत्व और उद्देश्यडेडियापाड़ा में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था जनजातीय बच्चों को शिक्षा पहुंचाने में आने वाली सबसे बड़ी बाधा, यानी उनके आवागमन को आसान और सुरक्षित बनाना।
प्रधानमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा के नाम से यह विशेष जनजातीय परिवहन बसें बजट की गईं, जो कि आदिवासी इलाकों में बच्चों को स्कूलों तक घर से लेकर ले जाने और वापस लाने का काम करेंगी। इससे न केवल उनकी पढ़ाई में नियमितता आएगी बल्कि उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
बस सेवा के माध्यम से क्षेत्र के बच्चे बेहतर शिक्षा सुविधाओं तक पहुंच सकेंगे जो पूर्व में दूरी और परिवहन की कठिनाइयों के कारण सीमित थी।शिक्षा की गुणवत्ता और विकास परियोजनाएंप्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार ने जनजातीय बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
गुजरात में कई एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों और जनजातीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों का परिणाम यह हुआ है कि अब ट्राइबल बच्चों की संख्या इन स्कूलों में 60 प्रतिशत बढ़ गई है। साथ ही, स्थानीय भाषा में पढ़ाई की सुविधा भी प्रदान की जा रही है जिससे भाषा की बाधा दूर होकर बच्चे शिक्षा में पिछडऩे से बच रहे हैं।
भगवान बिरसा मुंडा का आदर्श और जनजातीय गौरवइस परियोजना का नामकरण भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर किया गया है, जो एक महान जनजातीय नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका आदर्श आज भी जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब-जब देश के स्वाभिमान और सम्मान की बात आई, तब जनजातीय समाज सबसे आगे खड़ा रहा है।
इस प्रकार, बस सेवा का यह शुभारंभ न केवल शिक्षा की समस्या का समाधान है, बल्कि जनजातीय गौरव और उनकी संस्कृति के संरक्षण का भी प्रतीक है।विस्तृत परियोजना और भविष्य की योजनाएंप्रधानमंत्री ने बताया कि 14 जनजातीय जिलों के लिए कुल 250 बसें बजट की गई हैं जो इन इलाकों के लोगों की यात्रा और संपर्क को बेहतर बनाएंगी। इसके अलावा, 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की आधारशिला भी रखी गई है, जिनमें आधुनिक सुविधाएं होंगी।
सरकार ने जनजातीय बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगभग 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है और यह निरंतर बढ़ रहा है। महोदया ने यह भी बताया कि अब आदिवासी छात्र स्वास्थ्य, हॉस्टल, और स्थानीय भाषा में शिक्षा की बेहतर सुविधाओं के साथ अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं।सामाजिक और आर्थिक विकास में भूमिकाजनजातीय परिवहन बस सेवा बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रेरित कर रही है।
इससे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा क्योंकि शिक्षित युवा ही क्षेत्र की प्रगति में मुख्य योगदानकर्ता होंगे। बस सेवा के माध्यम से अभिभावकों को भी शांति मिलेगी कि उनके बच्चे सुरक्षित परिवहन से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यह पहल जनजातीय बच्चों के लिए एक मजबूती और सुरक्षा का संदेश है।इस प्रकार, डेडियापाड़ा में भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय परिवहन बसों को हरी झंडी दिखाकर शिक्षा की पहुंच को आसान बनाना एक बड़ा कदम है, जो जनजातीय समाज के बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद लेकर आया है।
यह सेवा उनके सपनों को पूरा करने और देश के विकास में उनकी भागेदारी को सशक्त करने वाली है।यह आयोजन भारत सरकार की आदिवासी क्षेत्र के लिए समर्पित योजनाओं और प्रयासों का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में जनजातीय समाज को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगा। डेडियापाड़ा में इस व्यापक परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि आदिवासी बच्चों के जीवन में