वाराणसी से उठी नई लहर: धर्मेंद्र कुमार निषाद और चंद्रभान निषाद ने भरी हुंकार, ‘मुक्त दवाई-मुक्त पढ़ाई’ बना राष्ट्रव्यापी संकल्पवाराणसी।
गंगा तट की पवित्र धरती पर रविवार को एक नई राजनीतिक चेतना का जन्म हुआ। इस ऐतिहासिक पल के केंद्र में रहे जनसेवा के प्रतीक धर्मेंद्र कुमार निषाद, जिन्होंने देश के शोषित, वंचित और पिछड़े समाज के अधिकारों की लड़ाई को जनआंदोलन का रूप देने का संकल्प लिया।
बैठक में मुख्य विशेषता रही “मुक्त दवाई-मुक्त पढ़ाई” की घोषणा, जो अब इस नई पार्टी का मूल नारा बन चुका है। बताया गया कि इस अभियान की नींव सर्वप्रथम फिशरमैन आर्मी के मुखिया चंद्रभान निषाद ने डाली थी।
उन्होंने अपने प्रयासों से समाज को यह विचार दिया कि हर भारतीय को निःशुल्क उपचार और शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। यही विचार आज एक आंदोलन का रूप ले चुका है।सभा में धर्मेंद्र कुमार निषाद ने स्पष्ट कहा कि यह नई राजनीतिक पार्टी केवल सत्ता की चाह नहीं रखती, बल्कि आम जनता की आवाज बनी रहेगी।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य ऐसा भारत बनाना है, जहाँ गरीब का इलाज और बच्चे की पढ़ाई किसी बोझ नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी बने।”चंद्रभान निषाद ने अपने संबोधन में फिशरमैन आर्मी के मिशन की चर्चा की और कहा कि अब समय आ गया है जब समाज के निचले तबके को भी समान अधिकार और सम्मान मिले।
उन्होंने देशभर के युवाओं से इस जनआंदोलन में जुड़ने की अपील की।वाराणसी में हुई यह बैठक अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। इसमें पंचायत, जिले और प्रांत स्तर तक संगठन फैलाने की रणनीति बनाई गई। सभा में उठे नारे “हक हमारा, अधिकार हमारा” और “मुक्त दवाई-मुक्त पढ़ाई हमारा अधिकार” ने माहौल को जोश और आशा से भर दिया।
इस नई पहल ने यह संदेश दिया कि जनता अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन की सक्रिय भागीदार बनेगी। धर्मेंद्र कुमार निषाद और चंद्रभान निषाद के नेतृत्व में इस पार्टी ने एक ऐसे भारत की कल्पना की है, जहाँ समानता, शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ हों।