इस बार फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने ज़बरदस्त बहुमत के साथ सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। एनडीए ने कुल 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक और प्रचंड सफलता हासिल की है।
इसके मुकाबले विपक्षी महागठबंधन को केवल 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि अन्य दलों को 6 सीटें मिलीं।नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 85 सीटें और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 89 सीटें जीती हैं।
इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान की पार्टी) को 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिली हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि एनडीए ने राज्य के लगभग हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
महागठबंधन मुख्य रूप से राजद, कांग्रेस, वामपंथी और विकासशील इंसान पार्टी का गठबंधन है, जिसे तेजस्वी यादव ने नेतृत्व दिया था। बावजूद इसके, महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। राजद को 25, कांग्रेस को 6, सीपीआई (एमएल) को 2, इंडियन इंक्लूसिव पार्टी और सीपीएम को एक-एक सीट मिली है।
तेजस्वी यादव अपने महत्वपूर्ण चुनाव क्षेत्र राघोपुर में विजय प्राप्त करने में सफल रहे, जबकि उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव चुनाव हार गए।इस चुनाव में मुख्य रूप से विकास और सुशासन का मुद्दा प्रभुत्व में था।
मतदाताओं ने जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर एनडीए के नेतृत्व वाले विकास एजेंडे को समर्थन दिया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सॉलिड छवि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भी बड़ी भूमिका मिली। कई नतीजों से यह स्पष्ट हुआ कि एनडीए ने एंटी-इनकंबेंसी के डर को पीछे छोड़ते हुए सत्ता में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।
नीतीश कुमार को उनके समर्थक “सुशासन बाबू” के नाम से जानते हैं, जो पिछले 20 वर्षों में कानून-व्यवस्था, सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला जयकारों जैसे क्षेत्रों में काम करने के कारण मिला है। चुनाव में महिलाओं के लिए योजनाओं का विशेष स्थान था, जिसने एनडीए को मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाया।इस प्रचंड बहुमत के साथ, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर दसवीं बार आसीन होंगे, जो बिहार में राजनीति में एक महत्वपूर्ण सफलता का संकेत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस परिणाम को बिहार की जनता का विकासवादी जनादेश बताया है और एनडीए की इस जीत को ‘ब्रांड मोदी-नीतीश’ की संयुक्त सफलता के रूप में देखा जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में एनडीए की सफलता का मूल कारण गठबंधन की मजबूती, जनादेश के प्रति जनता का विश्वास, और विपक्षी महागठबंधन की असंगठित रणनीतियाँ रहीं। महागठबंधन को अपने नेतृत्व, रणनीति और चुनावी ताकत पर नये सिरे से विचार करना होगा।
संक्षेप में कहा जाए तो बिहार में सरकार एक बार फिर एनडीए गठबंधन की बनेगी, जिसमें जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी प्रमुख भूमिका निभाएंगी। नीतीश कुमार के नेतृत्व में और प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से यह सरकार अगले पांच वर्ष बिहार में विकास एवं सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाएगी।
बिहार ने इस चुनाव में विकास के पक्ष को भारी बहुमत दिया है और सत्ता परिवर्तन का जो सपना महागठबंधन देख रहा था, वह इस बार पूरा नहीं हो पाया है। यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ