Luxembourg को 2-0 से हराया था। यह मुकाबला 14 नवंबर 2025 को World Cup क्वालीफाइंग मैच के तहत हुआ था।
मैच का सारांश
Germany ने इस मैच में लगातार दबदबे में खेलते हुए पहली बार पिछली कुछ हाफ की धीमी शुरुआत के बाद दूसरे हाफ में जोरदार प्रदर्शन किया। Newcastle के Nick Woltemade ने मैच की 49वीं और 69वीं मिनट में दोनों गोल किए।
Leroy Sané और Ridle Baku ने गोल बनाने में उनकी मदद की। मैच की शुरुआत में Luxembourg ने उच्च दबाव और आक्रमण के साथ Germany के सामने चुनौती पेश की, लेकिन अंततः Germany के क्लीन शीट के साथ मैच खत्म हुआ।
Luxembourg का खेलपहले हाफ में Luxembourg ने काफी ऊर्जा के साथ खेल दिखाया, खासकर Christopher Martins और Sinani जैसे खिलाड़ियों की मदद से। उन्होंने German डिफेंस को कई बार चुनौती दी और एकबार उनके खिलाड़ी Aiman Dardari का शॉट पोस्ट से लगा।
हालांकि, उनके गोल प्रयास सफल नहीं रहे।Germany का खेलGermany की शुरुआत थोड़ी सुस्त रही, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने पकड़ बनाई। Goretzka के ड्रिबल के बाद Wirtz की कोशिश खासा प्रभावी रही। Woltemade के दोनों गोल इसी बदलाव को दर्शाते हैं। Germany ने अपने अनुभव और संगठन का परिचय देते हुए क्वालीफिकेशन के लिए मजबूती से कदम बढ़ाए।
ऐतिहासिक दृष्टिकोणइतिहास में Germany का Luxembourg पर बड़ा वर्चस्व रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक के मुकाबलों में Germany की जीत प्रमुख रही है, जबकि Luxembourg ने बहुत कम मैच जीते हैं। Germany ने अक्सर बड़े अंतर से मैच जीते हैं।तकनीकी और सांख्यिकीमैच में Germany का कब्जा लगभग 65% रहा जबकि Luxembourg के पास 35% था।
Germany ने 1 शॉट ऑन टारगेट किए जबकि Luxembourg ने 4 कॉर्नर लिए।Germany की टीम ने ज़्यादा स्ट्राइकिंग अवसर बनाए, लेकिन Luxembourg की डिफेंस ने मैच तक टिकाव दिखाया।भविष्य की संभावनाएंGermany इस जीत के साथ World Cup क्वालीफिकेशन की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। जबकि Luxembourg को क्रमागत सुधार की जरूरत है ताकि वे विश्व स्तर की प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
इस तरह से Luxembourg और Germany की फुटबॉल टीम के बीच यह मैच जापानी क्वालीफाइंग दौर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसमें Germany ने अपनी क्लीनी और रणनीतिक क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि Luxembourg ने बढ़त पाने के लिए दमखम दिखाया लेकिन जीत हाथ नहीं लगी।
यह मुकाबला इंगित करता है कि बड़े फुटबॉल देशों के सामने छोटे फुटबॉल राष्ट्रों की चुनौतियां कितनी बड़ी होती हैं, पर साथ ही यह भी दिखाता है कि प्रतिस्पर्धा में सुधार और विकसित होना कितना जरूरी है।