सोनहा थाना क्षेत्र के नरखोरिया गांव की 47 वर्षीय महिला मनिता देवी, जो चेतन समूह और भारत समूह से करीब चार लाख रुपये का समूह कर्ज लेकर लगातार किश्तें चुकाने में असमर्थ थी, ने अपने ऊपर लगे कर्ज के भारी बोझ से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
महिला पर समूह के जिम्मेदारों द्वारा बार-बार वसूलने और दवाब बनाने से मानसिक तनाव बढ़ा था। वसूली के एजेंट लगातार पैसे के लिए दबाव और प्रताड़ना डालते थे, जिससे वह अत्यंत परेशान थी।
मनीता देवी अपने पति बसंत सोनी की पत्नी थीं और उनके दो बेटे मजदूरी करते हैं। वह अपने घर के बरामदे में फांसी के सहारे आत्महत्या की घटना को अंजाम दिया। घटना की जानकारी पर परिवार में कोहराम मच गया।
परिजनों ने बताया कि कर्ज की किश्त जमा करने के लिए लगातार दबाव डालने के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी, जिसकी वजह से उसने यह कदम उठाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है।
यह घटना समूह कर्ज के कारण महिलाओं पर बढ़ते दबाव और आर्थिक तंगी की एक दुखद मिसाल है। कई बार महिलाओं को मजबूरन कर्ज लेने पड़ते हैं, जो वापस करना मुश्किल होता है, और जब वसूली का दबाव बढ़ता है तो वे मानसिक तनाव में आ जाती हैं। इस केस ने समूह कर्ज के सामाजिक और मानसिक प्रभावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।