प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम का श्रीराम-निषादराज मिलन स्थल आज भी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का स्थान है, लेकिन वर्तमान में इसके स्थिति में काफी गिरावट आई है। समाचारों के मुताबिक, यह स्थल कागजों पर चमकता तो है, लेकिन असल में नजरअंदाजगी और लापरवाही के कारण अंधकार में डूबा हुआ है।
स्रोतों के अनुसार, तीन करोड़ रुपये की लागत से उज्जवल बनाने का दावा तो किया गया है, पर हकीकत में घाट और जगहें बहुत ही बदहाल हैं। प्रकाश व्यवस्था के लिए लगी लाइटें जगह-जगह खराब हो चुकी हैं, सोलर पैनल गायब हैं और मरकरी लाइटें खराब हालत में हैं। घाट की सीढ़ियां रेत और कचरे से भरी पड़ी हैं, और गंगा में गंदा पानी सीधे गिर रहा है।
यह स्थान रामायण काल से जुड़ा हुआ है, जहां भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान निषादराज की सहायता से गंगा नदी पार की थी। इस जगह का धार्मिक महत्व इतना है कि इसके घाटों से आज भी उस समय की स्मृतियों और ऐतिहासिक घटनाओं की कहानियां जुड़ी हैं। रामायण में उल्लेख है कि यहां राम का निषादराज से मिलन हुआ था, और इसी स्थल से उन्होंने पहली बार गंगा नदी पार की थी
हालांकि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के विकास के कई प्रयास किए हैं, पर वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है। सरकारी आंकड़ों और दिखावटी व्यवस्था के बावजूद, घाट की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुविधाओं की हालत गंभीर है। कई जगहों पर तो घाट जर्जर और उपेक्षित हैं।
यह स्थल, जहां भगवान राम ने निषादराज से मिलकर गंगा पार की थी, आज लापरवाही और अनदेखी का शिकार है। यदि इस पवित्र स्थल का सच्चा सम्मान और संरक्षण किया जाए, तो यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अहम स्थान बन सकता है।
