पुलिस प्रशिक्षण में नैतिकता और छविपुलिस अधिकारियों की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें यह सीखाना जरूरी है कि कर्तव्य निभाते वक्त ईमानदारी और नैतिकता का पालन करें। समाज में पुलिस की छवि तभी अच्छी बनी रह सकती है जब अधिकारी नियम-कानून के साथ नैतिक मूल्यों का भी पालन करें।
प्रशिक्षण में नैतिक दर्शन जोड़ने से पुलिसकर्मियों की छवि में सुधार होता है, उनकी जनता में विश्वसनीयता बढ़ती है और वे मुश्किल परिस्थितियों में भी सही फैसला ले पाते हैं।
इससे पुलिस अधिकारी न सिर्फ अपने कर्तव्यों को सही तरह निभा सकते हैं बल्कि अनावश्यक विवादों और बदनामी से भी बच सकते हैं।
ट्रैफिक नियमों का महत्व और पालनट्रैफिक नियम सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि आपकी और दूसरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। पुलिस की पाठशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों में बताया जाता है कि सड़क पर वाहन चलाते समय कुछ बुनियादी नियम सबसे जरूरी हैं
ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें:

लाल, पीली और हरी बत्ती के संकेतों को अनदेखा करना हादसे का जोखिम बढ़ा सकता है।निर्धारित गति में वाहन चलाएं: तेज़ स्पीड सड़क पर अपने साथ दूसरों की जान भी खतरे में डालती है।
हेलमेट और सीट बेल्ट:
बाइक चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट दुर्घटना की स्थिति में जीवन रक्षक साबित होते हैं।नशा या थकान में वाहन न चलाएं:
नशे की हालत में गाड़ी चलाना जायज़ नहीं है और यह दंडनीय अपराध भी है।मॉबाइल का इस्तेमाल न करें: गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने से ध्यान भटकता है और दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
वाहन के कागज़ात रखें:
ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र हमेशा साथ रखें।सीट बेल्ट, हेलमेट न पहनने और अन्य उल्लंघनों पर सख्त जुर्माना: नई गाइडलाइन्स के अनुसार भारी जुर्माने का प्रावधान