भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में कुछ पर्व ऐसे हैं जो लोक जीवन से आत्मा की तरह जुड़े हुए हैं। छठ पूजा, जिसे छठी मइया का पर्व भी कहा जाता है,
ऐसा ही एक उत्सव है जो सूर्य देव और मां छठी के प्रति अटूट भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि शुद्धता, अनुशासन, पर्यावरण प्रेम और पारिवारिक एकता का महोत्सव है।छठ पूजा का आरंभ और महत्वछठ पूजा का इतिहास वैदिक काल तक पहुंचता है।
माना जाता है कि सूर्य उपासना की प्रथा उस समय से चलती आ रही है जब मनुष्य ने प्रकृति के पंचतत्वों को पूजा का आधार बनाया। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, माता छठी को सूर्य देव की बहन माना जाता है। छठ पूजा में सूर्य की उपासना और उनकी किरणों से जीवन ऊर्जा प्राप्त करने का उद्देश्य प्रमुख है।पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि भगवान राम और सीता माता ने भी अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की पूजा की थी
जिससे इस पर्व की पवित्रता और बढ़ जाती है।चार दिनों की पवित्र परंपराछठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला अत्यंत अनुशासित पर्व है जिसमें व्रती (उपवास करने वाला व्यक्ति) कठोर नियमों का पालन करते हैं।पहला दिन – नहाय-खाय: व्रती स्नान कर घर की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं और अपने भोजन में केवल शुद्ध घर का बना अन्न लेते हैं।