एडवोकेट पिंटू साहनी गोरखपुर ग्रामीण के एक बेहद चर्चित युवा नेता, समाजसेवी और न्यायप्रिय अधिवक्ता हैं, जो ग्राम्य जनता की उम्मीदों और संघर्ष की आवाज़ बनते जा रहे हैं। बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनशक्ति सेना, उन्होंने हमेशा सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की पैरोकारी की है । पिंटू साहनी पूर्व में गोरखपुर लोकसभा से प्रत्याशी रह चुके हैं और अब 323-गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से भावी विधायक के रूप में जनता का विश्वास और समर्थन हासिल कर रहे हैं
प्रेरणादायक जीवन और संघर्ष
एडवोकेट पिंटू साहनी का जीवन संघर्षों, सामाजिक दायित्व और ईमानदारी का प्रतीक है। कम उम्र में ही छात्र राजनीति से समाज सेवा का बीड़ा उठाया। दीवानी कचहरी, गोरखपुर के अनुभवी अधिवक्ता के रूप में सैकड़ों गरीब-मजदूर, किसानों को न्याय दिलाने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। समाज में व्याप्त अन्याय के खिलाफ़ संघर्ष, पारदर्शिता की आवाज़ और विकास की सोच उनकी पहचान बन गई
गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर

गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा (323) उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और विविधता भरे क्षेत्रों में से एक है, जहाँ की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए संघर्ष कर रही है। यहाँ के मतदाताओं की संख्या लगभग 4.18 लाख है, जिसमें किसान, युवा, मजदूर और महिलाएं शामिल हैं।
विकास के संकल्प और जनसरोकारपिंटू साहनी का जीवन आदर्श है उन युवाओं के लिए जो राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। उनकी प्राथमिकताएं:
क्षेत्र के हर गाँव तक शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था पहुँचाना
।बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार मेले और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
महिला सशक्तिकरण के लिए स्वरोजगार योजना और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करना
।किसानों की आमदनी बढ़ाने, सिंचाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देना।
जनआंदोलन और सच्ची आवाज़
एडवोकेट पिंटू साहनी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है, हर वर्ग– हर मज़बूर, हाशिए पर खड़े नागरिक की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना। उन्होंने जनशक्ति सेना के माध्यम से भ्रष्टाचार, शिक्षा की दुर्दशा, पुलिस प्रशासन की मनमानी आदि बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष के कई आंदोलन खड़े किए
जनता के प्रति समर्पण
पिंटू साहनी ने गोरखपुर ग्रामीण की जनता से वादा किया है कि हर परिस्थिति में वे उनके साथ खड़े रहेंगे। उनका कहना है — “चुनाव जीतना तो एक ज़रिया है, असली मकसद ग्रामीण जनता के सपनों को पूरा करना है।” उनकी सक्रियता, संघर्षशीलता और बेदाग छवि उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है