उत्तर प्रदेश में अब सड़क निर्माण का काम पहले से कहीं तेज़ी से आगे बढ़ेगा। पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) में 30 साल बाद अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में बड़ा इजाफा किया गया है। इससे न केवल निर्माण गति मिलेगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। विभागीय अधिकारियों को अब 5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों की टेंडर स्वीकृति और दो करोड़ रुपये तक के कार्यों की तकनीकी स्वीकृति देने का अधिकार मिल गया है। पहले यह सीमा मात्र एक करोड़ 40 लाख रुपये थी।
वित्तीय अधिकारों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को ऐसी राहत 30 वर्ष बाद मिली है। अब मुख्य अभियंता 5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के टेंडर, बिल आदि की स्वीकृति दे सकते हैं। अधिशासी अभियंता को अब 40 लाख से दो करोड़ रुपये तक के कार्यों की टेक्निकल स्वीकृति देने का अधिकार मिल गया है। इससे पहले अधिशासी अभियंता केवल 40 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए स्वीकृति दे सकते थे।
योजनाओं में तेज़ी और जवाबदेही
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विभागीय अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में निर्णय लेने की अधिक आज़ादी मिलेगी। इससे प्रोजेक्ट्स की फाइलें बार-बार मुख्यालय या ऊपर के स्तर पर नहीं जाएंगी और सड़क निर्माण तथा मरम्मत के लिए धनराशि जल्दी स्वीकृत होगी। इससे निर्माण कार्यों की रफ्तार तेज़ होगी और जनसुविधाओं का विस्तार भी त्वरित रूप से हो पाएगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया
कि इन बदलावों से प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता दोनों ही बढ़ेगी। साथ ही, विभागीय कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा। इसमें अधिकारियों को समय-समय पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइंस भी दी गई हैं।नई गाइडलाइंस और कार्यान्वयनपीडब्ल्यूडी की तरफ से किए गए प्रजेंटेशन में बताया गया कि पिछली बार 1995 में अफसरों के वित्तीय अधिकार तय किए गए थे
। तब के मुकाबले आज सड़क निर्माण की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, अब ठेके और निर्माण कार्यों के अनुमोदन की सीमा बढ़ाई गई है। इसके साथ ही, विधुत और यांत्रिक कार्यों के लिए भी अफसरों के अधिकार दोगुने कर दिए गए हैं।