ग्राम सभा बाघागाड़ा, जीतपुर के प्रधान मनोहर उर्फ। नाहर निषाद एक ऐसा नाम है, जो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संवेदना, संघर्ष और समाज की सेवा की एक मिसाल है। छठ पूजा के इस पावन अवसर पर उनका योगदान और उनके विचार ग्राम के प्रत्येक घर-परिवार में नई ऊर्जा और आशा का संचार करते हैं।
गाँव की मिट्टी से निकले मनोहर निषाद का जीवन सादगी, समर्पण और कठिन मेहनत से गढ़ा गया है। ग्रामसभा बाघागाड़ा एक बड़ा गाँव है, यहाँ के लोग अक्सर संसाधनों की कमी, विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करते आए हैं। लेकिन जब से मनोहर निषाद ने ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी संभाली, उन्होंने इन चुनौतियों का सामना पूरे जज्बे व विश्वास के साथ किया।
छठ पर्व की तैयारी, घाटों की सफाई, बिजली-पानी की व्यवस्था, गरीब परिवारों के लिए विशेष व्यवस्था—इन सबमें उनकी व्यक्तिगत मेहनत और संलग्नता साफ झलकती है।मनोहर निषाद अपने कार्यों में हमेशा मानवीयता को सर्वोपरि रखते हैं। छठ पूजा का पर्व उनकी नजर में केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गाँव की एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक है। वह हमेशा कहते हैं कि छठ पूजा में घाट पर जुटने वाली भीड़ में समाहित है गाँव का सामूहिक सपना—सभी के बेहतर जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य व समृद्धि का सपना

ग्राम सभा के विकास के क्षेत्र में मनोहर निषाद ने तमाम सरकारी योजनाओं को पारदर्शिता के साथ गाँव में लागू कराया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के कायाकल्प से लेकर जल-संरक्षण की नई व्यवस्थाएँ कीं, तालाब के सुंदरीकरण की कोशिशें, युवाओं को स्वरोजगार देने के लिए कैंप लगवाना और महिलाओं की शालीनता व आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने जैसी कई योजनाएँ सफलतापूर्वक चलाईं।
छठ के अवसर पर उनकी यह परिकल्पना रही है कि हर परिवार, चाहे गरीब हो या संपन्न, सभी को पर्व की अनुभूति एक जैसी हो और कोई भी सुविधा से वंचित ना रहे।उनके वचनों और संवेदना में गाँव के प्रति गहरा जुड़ाव है
—यही कारण है कि ग्राम सभा का हर निवासी उन्हें अपना अपना साथी, मार्गदर्शक और परिवार का सदस्य मानता है। छठ के दौरान वे स्वयं छोटी-छोटी व्यवस्थाओं से लेकर बड़े आयोजन तक में सक्रिय भूमिका निभाते हैं—माँझी, मल्लाह और श्रमिकों को प्रोत्साहित करना, बच्चों की प्रतियोगिताओं का आयोजन, महिलाओं के सम्मान हेतु आश्वासन और वृद्धों की जरूरतें पूरी करना
—इन सबमें उनका अलग ही अपनापन दिखता है।छठ पूजा के अवसर पर मनोहर निषाद अपने संदेश में गाँव की एकता, सर्वधर्म समभाव और लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर देते हैं।

वे कहते हैं, “छठ पर्व सूर्य उपासना, प्रकृति प्रेम और सामूहिक संस्कार का उत्सव है; हमें मिलजुलकर अपने गाँव को स्वच्छ, सुंदर व खुशहाल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।” उनका यह विचार हर आयु वर्ग के लोगों में नई प्रेरणा भर देता है
मनोहर निषाद की सबसे बड़ी सुंदरता उनके व्यवहार और नेतृत्व में दिखाई देती है। वे किसी भी विवाद या समस्या का समाधान संवाद और सहमति से करते हैं, गाँव के हर वर्ग को साथ लेकर चलना उनकी प्राथमिकता रही है। छठ पूजा के मौके पर वे सबके द्वार जाते हैं,
आशीर्वाद लेते हैं और शुभकामनाएँ देते हैं—इस परंपरा ने उन्हें गाँव के बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों सभी का प्रिय बना दिया है।छठ पूजा ऐसा पर्व है, जो गाँव की विशेष भावनाओं और आत्मीय एकता का प्रतीक बन चुका है।
मनोहर निषाद ने इस पर्व को साधारण व्यवस्था से निकालकर गाँव की अस्मिता, स्वाभिमान और विकास का पर्व बना दिया है। उनकी दूरदर्शिता, दयालुता और नेतृत्व का उजाला छठ के सूरज की तरह गाँव में फैला है
।आज छठ के इस शुभ अवसर पर ग्राम सभा बाघागाड़ा का प्रत्येक निवासी गर्व से कह सकता है कि उसके गाँव का नेतृत्व एक ऐसे प्रधान के हाथों में है, जो कर्तव्य, सेवा और प्रेम का सच्चा प्रतीक है।
उनकी प्रेरणा आगे भी गाँव को संगठित, प्रगतिशील व सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाए रखेगी—यही उनकी सच्ची सफलता और छठ पूजा का पावन संदेश है