
आप कहना चाह रहे हैं — “महात्मा बुद्ध और कुशीनगर (कुशी नारा) से संबंधित आर्शवचन या निर्वाण से जुड़ी जानकारी” — तो मैं आपको इसका स्पष्ट और विस्तृत विवरण नीचे दे रहा हूँ 👇
🕊️ महात्मा बुद्ध और कुशीनगर का संबंध
कुशीनगर (जिसे प्राचीन काल में कुशी नारा कहा जाता था) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक अत्यंत पवित्र बौद्ध स्थल है। यह वह स्थान है जहाँ भगवान गौतम बुद्ध ने अपना महापरिनिर्वाण (निर्विजीव अवस्था — अर्थात शरीर त्याग) किया था।
🌸 निर्वाण की घटना
- महात्मा बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश कुशी नारा के साल वृक्षों के नीचे दिया था।
- यह घटना लगभग 543 ईसा पूर्व में मानी जाती है।
- उन्होंने अपने शिष्य आनंद को बताया था कि —
“सभी वस्तुएँ नश्वर हैं, अतः अपने प्रयत्न से अपने उद्धार का मार्ग बनाओ।”
💬 महात्मा बुद्ध के अंतिम वचन (आर्शवचन)
“हे भिक्षुओं! सभी संयोगी धर्म अनित्य हैं।
तुम अपने प्रयत्न से अपना कल्याण करो।”
— महापरिनिर्वाण सूत्र
इन वचनों में बुद्ध ने यह सिखाया कि संसार में कोई भी चीज स्थायी नहीं है —
हर वस्तु परिवर्तनशील है।
इसलिए मनुष्य को बाहरी आसक्तियों से मुक्त होकर स्वयं के प्रयास से मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त करना चाहिए।
🪷 कुशीनगर का महत्व
- यहाँ महापरिनिर्वाण मंदिर स्थित है, जिसमें बुद्ध की सोई हुई विशाल मूर्ति है।
- यह मूर्ति सोने जैसी आभा लिए हुए है और बुद्ध के दाएँ करवट निर्वाण की अवस्था को दर्शाती है।
- कुशीनगर आज भी बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए सबसे प्रमुख स्थल है — जहाँ दुनिया भर के लोग श्रद्धा से आते हैं।