ब्रहमोस मिसाइलों की नई उपलब्धि: पाकिस्तान की हर इंच जमीन अब भारत की रेंज में
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भारतीय रक्षा मंत्री ने हाल ही में लखनऊ स्थित ब्रहमोस एयरोस्पेस यूनिट से मिसाइलों की पहली खेप रवाना करते हुए ऐतिहासिक घोषणा की कि अब पाकिस्तान की एक-एक इंच जमीन भारत की ब्रहमोस मिसाइलों की पहुंच में है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे देश की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण बताया और साथ ही कहा कि भारत के लिए जीत अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक आदत बन चुकी है
लखनऊ में आयोजित समारोह में
रक्षामंत्री ने कहा कि ब्रहमोस सिर्फ मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर में ब्रहमोस का प्रैक्टिकल प्रदर्शन न सिर्फ देशवासियों, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आत्मविश्वास का सबब बना है. इस प्रदर्शन ने पाकिस्तान समेत सभी विरोधियों को यह संदेश दे दिया कि ब्रहमोस से बचना मुमकिन नहीं है।
रक्षामंत्री ने
इस अवसर पर जोर देकर कहा कि ब्रहमोस मिसाइलें अब भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की रीढ़ बन चुकी हैं। पाकिस्तान की भारत के प्रति गलतफहमी अब पूरी तरह दूर हो गई है और वह भारत की स्वदेशी क्षमता का आंकलन कर चुका है उन्होंने कहा, “अगर भारत पाकिस्तान को जन्म दे सकता है, तो समय आने पर वह ब्रहमोस से क्या कर सकता है, यह बताने की आवश्यकता नहीं है।”
लखनऊ की नई पहचान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और कहा कि लखनऊ अब केवल तहज़ीब का नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का भी शहर बन गया है। ब्रहमोस यूनिट के निर्माण से देश की सुरक्षा मजबूत हुई है और सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी मिला है। यूनिट से मिलने वाली जीएसटी से राज्य को आर्थिक समृद्धि भी हो रही है
ब्रहमोस की उत्पादन क्षमता
रक्षामंत्री ने बताया कि लखनऊ ब्रहमोस यूनिट से हर साल लगभग 100 मिसाइल सिस्टम थलसेना, वायुसेना और नौसेना को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी। आने वाले वर्षों में इसका टर्नओवर 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है, साथ ही 500 करोड़ रुपये का जीएसटी प्राप्त होगा
मित्र देशों के लिए भी
रक्षामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रहमोस मिसाइल अब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि मित्र देशों की रक्षा में भी सहायक होगी. इस मिसाइल के निर्यात समझौते फिलीपींस के साथ हो चुके हैं और अन्य देशों के साथ व्यापाक सहयोग की संभावना है।