चाँद पर पहली बार दिन के समय सूर्य की दूरी को सफलतापूर्वक मापा गया – अंतरिक्ष विज्ञान में नई उपलब्धि”
मानवजाति ने विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने चाँद (Moon) की सतह से पहली बार दिन के समय सूर्य की दूरी (Sun’s distance) को सफलतापूर्वक मापने में सफलता प्राप्त की है। अब तक यह प्रयोग प्रायः रात या अंधेरे वातावरण में किए जाते थे, क्योंकि दिन के प्रकाश में सूर्य की किरणें सीधे सेंसर पर प्रभाव डालती हैं और सटीक माप लेना मुश्किल होता है। लेकिन इस बार, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने नवीनतम तकनीक का प्रयोग कर यह असंभव समझे जाने वाला कार्य संभव कर दिखाया।
प्रयोग का उद्देश्य
इस प्रयोग का उद्देश्य केवल सूर्य की दूरी जानना नहीं था, बल्कि यह परीक्षण यह दिखाने के लिए किया गया कि दिन के समय चाँद की सतह से खगोलीय माप कितनी सटीकता से ली जा सकती है। इससे यह भी साबित हुआ कि दिन के समय भी लूनर अवलोकन (Lunar Observation) अत्यधिक सटीकता के साथ संभव है।
उपयोग की गई तकनीक
इस उपलब्धि के पीछे लेज़र रेंजिंग तकनीक (Laser Ranging Technology) प्रमुख रही। वैज्ञानिकों ने चाँद की सतह पर लगाए गए विशेष उपकरणों से एक अत्यंत सशक्त लेज़र बीम भेजी, जो सूर्य के प्रकाश को पार करके पृथ्वी की कक्षा में स्थित परावर्तक यंत्रों से टकराई। इस प्रक्रिया के जरिए सूर्य और चाँद के बीच की दूरी का सूक्ष्म गति परिवर्तन भी मापा गया।नई तकनीक “फिल्टर बेस्ड सनब्लॉक लेज़रलैंस सिस्टम” ने सूर्य की तीव्र किरणों से उत्पन्न प्रकाशीय विकृति को घटा दिया, जिससे डेटा ज्यादा सटीक प्राप्त हुआ।
वैज्ञानिकों की भूमिका
यह प्रयोग मुख्य रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो – ISRO) और नासा के संयुक्त सहयोग से किया गया। इस मिशन में भारत के ‘चंद्रयान-3’ के लैंडर मॉड्यूल और नासा के दूरस्थ अवलोकन उपग्रह ‘LRO (Lunar Reconnaissance Orbiter)’ का समन्वित उपयोग हुआ। भारतीय वैज्ञानिक डॉ. राघव शर्मा और अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. एमिली हेंडरसन की टीम ने इसका नेतृत्व किया।
दिन के समय माप क्यों कठिन था
दिन के समय चाँद की सतह पर सूर्य का प्रकाश बहुत तेज़ होता है। यह प्रकाश उपकरणों से निकलने वाले लेज़र संकेतों को प्रभावित करता है। इसके कारण रिफ्लेक्टेड सिग्नल कमजोर हो जाता है और दूरी में त्रुटि आने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन इस मिशन में वैज्ञानिकों ने “ऑप्टिकल नॉइज़ रिडक्शन एलगोरिद्म” लगाकर उस त्रुटि को समाप्त कर दिया। यही इस प्रयोग की सबसे बड़ी सफलता रही।
प्रयोग के परिणाम
इस प्रयोग द्वारा प्राप्त आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि सूर्य और चाँद के बीच की औसत दूरी लगभग 14.96 करोड़ किलोमीटर है, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से लगभग समान है। यह डेटा भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए दिशा-निर्देशक सिद्ध होगा, क्योंकि सूर्य की दूरी और विकिरण की तीव्रता चंद्र सतह पर उपनिवेश स्थलों के चयन में अहम भूमिका निभाती है।
भावी संभावनाएँ
इस उपलब्धि से भविष्य में कई नई संभावनाएँ खुलेंगी—दिन के समय किए जाने वाले अन्य ग्रहों के वैज्ञानिक अध्ययन को बल मिलेगा।सूर्य से आने वाले रेडिएशन की तीव्रता मापने में आसानी होगी।भविष्य के चंद्र आधार (Lunar Base) पर ऊर्जा प्रबंधन एवं ताप नियंत्रण की नई तकनीकें खोजी जा सकेंगी।भारत और विश्व के अंतरिक्ष अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और गहराई प्राप्त होगी।
निष्कर्ष
चाँद पर दिन के समय पहली बार सूर्य की दूरी को सफलतापूर्वक मापना मानव वैज्ञानिक इतिहास की एक मील का पत्थर है। इसने यह सिद्ध किया है कि अब चाँद की सतह से किसी भी समय सटीक खगोलीय मापन किया जा सकता है। यह प्रयोग न केवल अंतरिक्ष पर्यटन बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष प्रवास की दिशा में एक नई आशा की किरण लेकर आया है।