भारत आज न केवल एक सशक्त ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड के रूप में उभरा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को टिकाऊ बनाने के लिए तकनीकी स्वायत्तता की दिशा में भी तेज़ी के साथ आगे बढ़ रहा है। आधुनिक विश्व में युद्ध और शक्ति-संतुलन अब केवल सैन्य ताकत या हथियारों की होड़ नहीं रह गई; इसमें तकनीकी श्रेष्ठता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है
।तकनीकी स्वायत्तता: आधुनिक भारत की आवश्यकताआज के डिजिटल युग में वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि तकनीकी संप्रभुता से भी निश्चित होती है। आधुनिक दिन के युद्ध साइबरस्पेस और सॉफ्टवेयर की दुनिया में भी लड़े जाते हैं, जहां विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी विदेशी कंपनी की क्लाउड सेवाएँ रुकने पर देश की बैंकिंग, रेल और ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह दर्शाता है कि भारत को “मेड इन इंडिया” के तहत न केवल हार्डवेयर बल्कि सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा में भी आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है
राष्ट्रीय सुरक्षा में स्वदेशी तकनीक की भूमिकाभारतीय रक्षा क्षेत्र में भी “मेक इन इंडिया” पहल ने स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया है। इससे एक ओर रक्षा सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है, वहीं दूसरी ओर रोज़गार के नए अवसर और आर्थिक प्रगति भी हुई है।
अतीत में भारत ने अपने प्रमुख रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम की है और स्वदेशी तकनीकों का विकास किया है, जिससे रणनीतिक आत्मनिर्भरता मिली है औद्योगिक युग और युद्धऔद्योगिक क्रांति के बाद से ही दुनिया में युद्धों की प्रकृति बदल गई।
उत्पादन क्षमता, संसाधनों का बेहतर उपयोग और तकनीकी अविष्कार अब किसी भी राष्ट्र की युद्ध शक्ति का आधार बन गए हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत में औद्योगिक विकास ने गति पकड़ी थी — नए कारखाने खुले, पुराने कई पारियों में चले,
और बड़े पैमाने पर सामग्री का निर्माण हुआ उससे सीखते हुए, आज भी औद्योगिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केंद्रबिंदु बनी हुई है।भारत के लिए रणनीतिक लाभतकनीकी स्वायत्तता से भारत को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बड़ा लाभ मिलता है।
इससे देश न सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता, बल्कि नवप्रवर्तनकर्ता बन सकता है। साथ ही, डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अधोसंरचना में भी आगे बढ़ सकता है। यह सभी पहलू भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाते हैं
निष्कर्षमेड इन इंडिया का वर्तमान स्वरूप न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा, स्वायत्तता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए भी अनिवार्य है। तकनीकी, औद्योगिक और रणनीतिक नेतृत्व ही आने वाले युग में भारत को अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करेगा