गोरखपुर की पहचान बनते दुर्गेश साहनी : भावि प्रधान पद प्रत्याशी का संघर्ष और सेवा भाव
गोरखपुर।
ग्रामसभा की राजनीति में अक्सर ऐसे लोग कम ही देखने को मिलते हैं, जो बिना पद, बिना लाभ और बिना सत्ता के, लगातार जनता की सेवा करते रहें। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में भावि प्रधान पद प्रत्याशी दुर्गेश साहनी ने ऐसा कर दिखाया है। आज उनका नाम सिर्फ़ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक संघर्षशील, मेहनती और जुझारू इंसान के रूप में लिया जाता है।
दुर्गेश साहनी हमेशा लोगों के सुख-दुख में खड़े रहते हैं। चाहे किसी परिवार में बीमारी का संकट हो, किसी के घर शादी-ब्याह की मदद करनी हो, खेतों में सिंचाई की समस्या हो, गरीब बच्चों की पढ़ाई का मुद्दा हो या फिर बेरोजगार नौजवानों के भविष्य की चिंता — हर जगह उनकी मौजूदगी साफ़ दिखाई देती है।
जनता से जुड़ाव
ग्रामसभा के बुज़ुर्ग बताते हैं कि दुर्गेश साहनी न सिर्फ़ युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, बल्कि बुज़ुर्ग और महिलाएँ भी उन्हें अपने बेटे और भाई की तरह मानती हैं। गाँव की एक महिला कहती हैं — “जब भी हमें कोई परेशानी होती है, दुर्गेश सबसे पहले पहुँचते हैं। वह मदद के लिए कभी ‘ना’ नहीं कहते।”
संघर्ष की कहानी
दुर्गेश साहनी का जीवन आसान नहीं रहा। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने कठिन हालातों में मेहनत और संघर्ष किया। यही वजह है कि वह गरीब और मज़दूर वर्ग की तकलीफ़ों को बखूबी समझते हैं। उनके साथी कहते हैं कि दुर्गेश की ताक़त यही है कि वह हर वर्ग के लोगों से सीधे जुड़ते हैं और उनके मुद्दों को अपनी आवाज़ बनाते हैं।
विकास की सोच
प्रधान पद प्रत्याशी के रूप में दुर्गेश साहनी ने गाँव के लिए एक स्पष्ट विज़न तैयार किया है। वह कहते हैं कि ग्रामसभा का विकास तभी संभव है जब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और साफ-सफाई पर बराबर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कई बार यह प्रस्ताव रखा है कि गाँव में बेहतर स्कूल, अच्छे स्वास्थ्य केंद्र और मज़बूत सड़क व्यवस्था होनी चाहिए।
हर मौके पर खड़े
बाढ़ हो या सूखा, महामारी हो या बेरोज़गारी का संकट—हर मौके पर दुर्गेश साहनी ने लोगों का साथ दिया। कोविड-19 के समय उन्होंने मास्क, सैनिटाइज़र और दवाइयाँ वितरित कीं। लॉकडाउन में मज़दूरों को भोजन और राशन उपलब्ध कराया। गाँव में जिनके घर में खाने की दिक़्क़त हुई, वहाँ तक उन्होंने अपने स्तर से मदद पहुँचाई।
मेहनती और जुझारू
ग्रामसभा के लोग कहते हैं कि दुर्गेश साहनी कभी थकते नहीं। सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की समस्याएँ सुनते और समाधान की कोशिश करते रहते हैं। उन्हें एक “मेहनती और जुझारू इंसान” के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि आज गाँव का बच्चा-बच्चा उन्हें जानता और सम्मान देता है।
लोगों का विश्वास
ग्रामसभा के लोगों का मानना है कि अगर दुर्गेश साहनी प्रधान बनते हैं, तो गाँव में विकास की एक नई शुरुआत होगी। किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी, नौजवानों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और महिलाएँ आत्मनिर्भर बनेंगी।
निष्कर्ष
आज गोरखपुर की इस ग्रामसभा में दुर्गेश साहनी सिर्फ़ भावि प्रधान पद प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि जनता के सच्चे सेवक बन चुके हैं। लोग उनके कार्यों को सराहते हैं, उनकी नीतियों पर विश्वास जताते हैं और उन्हें गाँव का असली प्रतिनिधि मानते हैं। आने वाले चुनाव में उनका नाम न केवल चर्चाओं में है, बल्कि उम्मीद की किरण भी बन गया है।